अपरा एकादशी व्रत कथा क्या है ?

अपरा एकादशी व्रत कथा

अपरा एकादशी व्रत कथा

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है.अपरा एकादशी व्रत कथा के श्रवण से मनुष्य को अपार लाभ मिलता है.अपरा एकादशी के पूजन से ब्रम्हहत्या,गो हत्या,भ्रूणहत्या,परस्त्री गमन जैसे पापों से छुटकारा मिल जाता है

अपरा एकादशी व्रत कथा की शुरुआत

अपरा एकादशी व्रत कथा प्राचीन काल में महीध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा था.उसका छोटा भाई वज्रध्वज बड़ा ही क्रूर,अधर्मी तथा अन्यायी था.वह अपने बड़े भाई से द्वेष रखता था.उस पापी ने एक दिन रात्रि में अपने बड़े भाई की हत्या करके उसकी देह को एक जंगली पीपल के नीचे गाड़ दिया.

इस अकाल मृत्यु से राजा प्रेतात्मा के रूप में उसी पीपल पर रहने लगा और अनेक उत्पात करने लगा.एक दिन अचानक धौम्य नामक ॠषि उधर से गुजरे.उन्होंने प्रेत को देखा और तपोबल से उसके अतीत को जान लिया.अपने तपोबल से प्रेत उत्पात का कारण समझा.ॠषि ने प्रसन्न होकर उस प्रेत को पीपल के पेड़ से उतारा तथा परलोक विद्या का उपदेश दिया.


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दयालु ॠषि ने राजा की प्रेत से मुक्ति के लिए स्वयं ही अपरा एकादशी का व्रत किया और उसे अगति से छुड़ाने को उसका पुण्य प्रेत को अर्पित कर दिया.इस पुण्य के प्रभाव से राजा की प्रेत योनि सेमुक्ति हो गई.वह ॠषि को धन्यवाद देता हुआ दिव्य देह धारण कर पुष्पक विमान में बैठकर स्वर्ग को चला गया.

अपरा एकादशी व्रत कथा संपन्न

नोट:- हमें उम्मीद है आपको अपने सवाल “अपरा एकादशी व्रत कथा क्या है” का जवाब मिल गया होगा.इस आर्टिकल में लिखी गयी सभी जानकारी को लिखनें मे बेहद सावधानी बरती गयी है.फिर भी किसी भी प्रकार त्रुटि की संभावना से इनकार नही किया जा सकता.इसके लिए आपके सुझाव कमेंट के माध्यम से सादर आमंत्रित हैं.

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