आमलकी एकादशी व्रत कथा क्या है ?

आमलकी एकादशी व्रत कथा

आमलकी एकादशी व्रत कथा

आमलकी एकादशी व्रत कथा फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में होती है.मान्यताओं के अनुसार आमलकी एकादशी के व्रत का फल हजार गायों के दान जितना होता है.जो लोग आमलकी एकादशी करते है उन्हें विष्णुलोक जानेका भाग्य मिलता है.

इस बार आमलकी एकादशी व्रत कथा 17 मार्च 2019 को रविवार के दिन है.

आमलकी एकादशी व्रत कथा की शुरुआत

आमलकी एकादशी व्रत कथा

प्राचीन समय में वैदिक नामक एक नगर था.उस नगर में ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय, शूद्र, चारों वर्ण के लोग प्रसन्ततापूर्वक रहते थे.नगर में सदैव वेदध्वनि गूंजा करती थी.उस नगरी में कोई भी पापी, दुराचारी, नास्तिक आदि न था.उस नगर में चैत्ररथ नामक चंद्रवंशी राजा राज्य करता था.वह उच्चकोटि का विद्वान तथा धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति था, उसके राज्य में कोई भी गरीब नहीं था और न ही कंजूस. उस राज्य के सभी लोग विष्णु-भक्त थे. वहां के छोटे-बड़े सभी निवासी प्रत्येक एकादशी का उपवास करते थे.

एक बार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की आमलकी नामक एकादशी आई.उस दिन राजा और प्रत्येक प्रजाजन, वृद्धसे बालक तक ने आनंदपूर्वक उस एकादशी को उपवास किया.राजा अपनी प्रजा के साथ मंदिर में आकर कलश स्थापित करके तथा धूप, दीप, नैवेद्य, पंचरत्न, छत्र आदि से धात्री का पूजन करने लगा.वे सब धात्री की इस प्रकार स्तुति करने लगे-

“हे धात्री! आप ब्रह्म स्वरूपा हैं.आप ब्रह्माजी द्वारा उत्पन्न हो और सभी पापों को नष्ट करने वाली हैं, आपको नमस्कार है.आप मेरा अर्घ्य स्वीकार करो. आप श्रीरामचंद्रजी के द्वारा सम्मानित हैं, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ,मेरे सभी पापों का हरण करो.”


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उस दिन मंदिर में रात को सभी ने जागरण किया.रात के समय उस जगह एक बहेलिया आया.वह महापापी तथा दुराचारी था.अपने कुटुंब का पालन वह जीव हिंसा करके करता था.वह भूख-प्यास से अत्यंत व्याकुल था, कुछ भोजन पाने की इच्छा से वह मंदिर के एक कोने में बैठ गया.उस जगह बैठकर वह भगवान विष्णु की कथा तथा एकादशी माहात्म्य सुनने लगा.इस प्रकार उस बहेलिए ने सारीरात अन्य लोगों के साथ जागरण कर व्यतीत की.प्रातःकाल सभी लोग अपने-अपने निवास पर चले गए.

इसी प्रकार वह बहेलिया भी अपने घर चला गया और वहां जाकर भोजन किया.कुछ समय बीतने के पश्चात उस बहेलिए की मृत्यु हो गई.उसने जीव हिंसा की थी, इस कारण हालांकि वह घोर नरक का भागी था, परंतु उस दिन आमलकी एकादशी का व्रत तथा जागरण के प्रभाव से उसने राजा विदुरथ के यहां जन्म लिया.उसका नाम वसुरथ रखा गया. बड़ा होने पर वहचतुरंगिणी सेना सहित तथा धन-धान्य से युक्त होकर दस सहस्र ग्रामों का संचालन करने लगा.वह तेज में सूर्य के समान, कांति में चंद्रमा के समान, वीरता में भगवान विष्णु के समान तथा क्षमा में पृथ्वी के समान था. वह अत्यंत धार्मिक, सत्यवादी, कर्मवीर और विष्णु-भक्त था.वह प्रजा का समान भाव से पालन करता था.दान देना उसका नित्य का कर्म था.


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एक बार राजा वसुरथ शिकार खेलने के लिए गया.दैवयोग से वन में वह रास्ता भटक गया और दिशा का ज्ञान न होने के कारण उसी वन में एक वृक्ष के नीचे सो गया.कुछ समय पश्चात पहाड़ी डाकू वहां आए और राजा को अकेला देखकर ‘मारो-मारो’ चिल्लाते हुए राजा वसुरथ की ओर दौड़े. वह डाकू कहने लगे कि इस दुष्ट राजा ने हमारे माता-पिता, पुत्र-पौत्र आदि समस्त सम्बंधियों को मारा है तथा देश से निकाल दिया.अब हमें इसे मारकर अपने अपमान का बदला लेना चाहिए.इतना कह वे डाकू राजा को मारने लगे और उस पर अस्त्र-शस्त्र का प्रहार करने लगे.

उन डाकुओं के अस्त्र-शस्त्र राजा के शरीर पर लगते ही नष्ट हो जाते और राजा को पुष्पों के समान प्रतीत होते. कुछ देर बाद प्रभु इच्छा से उन डाकुओं के अस्त्र-शस्त्र उन्हींपर प्रहार करने लगे, जिससे वे सभी मूर्च्छित हो गए.उसी समय राजा के शरीर से एक दिव्य देवी प्रकट हुई. वह देवी अत्यंत सुंदर वस्त्रों तथा आभूषणों से अलंकृत थी.उसकी भृकुटी टेढ़ी थी. उसकी आंखों से क्रोध की भीषण लपटें निकल रही थीं.उस समय वह काल के समान प्रतीत हो रही थी.उसने देखते-ही-देखते उन सभी डाकुओं का समूल नाश कर दिया.नींद से जागने पर राजा ने वहां अनेक डाकुओं को मृत देखा. वह सोचने लगा किसने इन्हें मारा? इस वन में कौन मेरा हितैषी रहता है?राजा वसुरथ ऐसा विचार कर ही रहा था कि तभी आकाशवाणी हुई-

“हे राजन! इस संसार मे भगवान विष्णु के अतिरिक्त तेरी रक्षा कौन कर सकता है!”

इस आकाशवाणी को सुनकर राजा ने भगवान विष्णु को स्मरण कर उन्हें प्रणाम किया, फिर अपने नगर को वापसआ गया और सुखपूर्वक राज्य करने लगा और अंत में वैकुंठ धाम को गया.

●◆ आमलकी एकादशी व्रत कथा संपन्न ◆●

नोट:- हमें उम्मीद है आपको अपने सवाल ” आमलकी एकादशी व्रत कथा क्या है” का जवाब मिल गया होगा.इस आर्टिकल में लिखी गयी सभी जानकारी को लिखनें मे बेहद सावधानी बरती गयी है.फिर भी किसी भी प्रकार त्रुटि की संभावना से इनकार नही किया जा सकता.इसके लिए आपके सुझाव कमेंट के माध्यम से सादर आमंत्रित हैं.

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