कामिका एकादशी व्रत कथा क्या है ?

कामिका एकादशी व्रत कथा

कामिका एकादशी व्रत कथा

श्रावण मास की कृष्ण एकादशी को कामिका एकादशी व्रत कथा का श्रवण करते है.कामिका का एकादशी को भगवान कृष्ण और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है.इस एकादशी चावल और चावल से बनी चीज का सेवन वर्जित है. कामिका एकादशी को तुलसीपत्र के सेवन से विशेष लाभ मिलता है.

इस बार कामिका एकादशी व्रत कथा का श्रवण 28 जुलाई 2019 को रविवार के दिन करना चाहिए.

कामिका एकादशी व्रत कथा की शुरुआत

अर्जुन बोले- “हे मधुसूदन! मैंने आषाढ़ माहके शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना. अब आप मुझे श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनाने की कृपा करें. इस एकादशी का नाम क्या है? इसकी विधि क्या है? इसमें किस देवता का पूजन होता है? इसका उपवास करने से मनुष्य को किस फल की प्राप्ति होती है?”

भगवान श्रीकृष्ण बोले- “हे अर्जुन! मैं श्रावण माह की पवित्र एकादशी की कथा सुनाता हूँ, ध्यानपूर्वक श्रवण करो.

कामिका एकादशी व्रत कथा

कामिका एकादशी व्रत कथा

एक बार इस एकादशी की पावन कथा को भीष्म पितामहने लोकहित के लिये नारदजीसे कहा था.

एक समय नारदजी ने कहा- “हे पितामह! आज मेरी श्रावण के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की इच्छा है, अतः आप इस एकादशी की व्रत कथा विधान सहित सुनाइये.”

नारदजी की इच्छा को सुन पितामह भीष्म ने कहा- “हे नारदजी! आपने बहुत ही सुन्दर प्रस्ताव किया है.अब आप बहुत ध्यानपूर्वक इसे श्रवण कीजिए-

श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम कामिका है. इस एकादशी की कथा सुनने मात्र से ही वाजपेय यज्ञ के फल की प्राप्ति होती है.

कामिका एकादशीके उपवास में शङ्ख,चक्र,गदाधारी भगवान विष्णुका पूजन होता है.जो मनुष्य इस एकादशी को धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उन्हें गंगा स्नान के फल से भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है.सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहणमें केदार और कुरुक्षेत्रमें स्नान करने से जिस पुण्य की प्राप्ति होती है, वह पुण्य कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु की भक्तिपूर्वक पूजा करने से प्राप्त हो जाता है.

भगवान विष्णु की श्रावण माह में भक्तिपूर्वक पूजा करनेका फल समुद्र और वन सहित पृथ्वी दान करने के फल से भी ज्यादा होता है.व्यतिपात में गंडकी नदी में स्नान करने से जो फल प्राप्त होता है, वह फल भगवान की पूजा करने से मिल जाता है.संसार में भगवान की पूजा का फल सबसे ज्यादा है, अतः भक्तिपूर्वक भगवान की पूजा न बन सके तो श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का उपवास करना चाहिये.आभूषणों से युक्त बछड़ा सहित गौदान करने से जो फल प्राप्त होता है, वह फल कामिका एकादशी के उपवास से मिल जाता है.


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जो उत्तम द्विज श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का उपवास करते हैं तथा भगवान विष्णु का पूजन करते हैं, उनसे सभी देव, नाग, किन्नर, पितृ आदि की पूजा हो जाती है, इसलिये पाप से डरने वाले व्यक्तियों को विधि-विधान सहित इस उपवास को करना चाहिये.संसार सागर तथा पापों में फँसे हुए मनुष्यों को इनसे मुक्ति के लिये कामिका एकादशी का व्रत करना चाहिये.कामिका एकादशी के उपवास से भी पाप नष्ट हो जाते हैं, संसार में इससे अधिक पापों को नष्ट करने वाला कोई और उपाय नहीं है.

“हे नारदजी! स्वयं भगवान ने अपने मुख से कहा है कि मनुष्यों को अध्यात्म विद्या से जो फल प्राप्त होता है,उससे अधिक फल कामिका एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है.इस उपवास के करने से मनुष्य को न यमराज के दर्शन होते हैं और न ही नरक के कष्ट भोगने पड़ते हैं. वह स्वर्ग का अधिकारी बन जाता है.जो मनुष्य इस दिन तुलसीदल से भक्तिपूर्वक भगवान विष्णुका पूजन करते हैं, वे इस संसार सागर में रहते हुए भी इस प्रकार अलग रहते हैं, जिस प्रकार कमल पुष्प जल में रहता हुआ भी जल से अलग रहता है.तुलसीदल से भगवान श्रीहरि का पूजन करने का फल एक बार स्वर्ण और चार बार चाँदी के दान के फल के बराबर है.


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भगवान विष्णु रत्न, मोती, मणि आदि आभूषणों की अपेक्षा तुलसीदल से अधिक प्रसन्न होते हैं.जो मनुष्य प्रभु का तुलसीदल से पूजन करते हैं, उनके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं.हे नारदजी! मैं भगवान की अति प्रिय श्री तुलसीजी को प्रणाम करता हूँ.तुलसीजी के दर्शन मात्र से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और शरीर के स्पर्श मात्र से मनुष्य पवित्र हो जाता है.तुलसीजी को जल से स्नान कराने से मनुष्य की सभी यम यातनाएं नष्ट हो जाती हैं. जो मनुष्य तुलसीजी को भक्तिपूर्वक भगवान के श्रीचरण-कमलों में अर्पित करता है, उसे मुक्ति मिलती है.

इस कामिका एकादशी की रात्रि को जो मनुष्य जागरण करते हैं और दीप-दान करते हैं, उनके पुण्यों को लिखने में चित्रगुप्त भी असमर्थ हैं.एकादशी के दिन जो मनुष्य भगवान के सामने दीपक जलाते हैं, उनके पितर स्वर्गलोक में अमृत का पान करते हैं.भगवान के सामने जो मनुष्य घी या तिल के तेल का दीपक जलाते हैं, उनको सूर्य लोक में भी सहस्रों दीपकों का प्रकाश मिलता है.

कामिका एकादशी का व्रत प्रत्येक मनुष्य को करना चाहिये.इस व्रत के करने से ब्रह्महत्या आदि के सभी पाप नष्ट होजाते हैं और इहलोक में सुख भोगकर प्राणी अन्त में विष्णुलोक को जाते हैं. इस कामिका एकादशी के माहात्म्यके श्रवण व पठन से मनुष्य स्वर्गलोक को प्राप्त करते हैं.”

कामिका एकादशी व्रत कथा संपन्न

नोट:- हमें उम्मीद है आपको अपने सवाल “कामिका एकादशी व्रत कथा क्या है” का जवाब मिल गया होगा.इस आर्टिकल में लिखी गयी सभी जानकारी को लिखनें मे बेहद सावधानी बरती गयी है.फिर भी किसी भी प्रकार त्रुटि की संभावना से इनकार नही किया जा सकता.इसके लिए आपके सुझाव कमेंट के माध्यम से सादर आमंत्रित हैं.

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