शिवाजी महाराज कौन थे?

शिवाजी महाराज
शिवाजी महाराज

छत्रपति शिवाजी महाराज को हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। शिवाजी महाराज ने महाराष्ट्र में पाव जमाये निजामशाही, आदिलशाही और मोघल साम्राज्य को नेस्तनाबूत कर हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की।

शिवाजी महाराज कौन है
शिवाजी महाराज का ब्रिटिश म्युज़ियम में लगी असली पेंटिंग

 
नामशिवाजीराजे शहाजीराजे भोसले
जन्म19 फरवरी 1630
शिवनेरी किल्ला,जुन्नर
मृत्यु3 अप्रैल 1680
रायगड किल्ला
राज्याभिषेक6 जून 1674
माताजीजाबाई शहांजी भोसले
पिताशहाजी मालोजी भोसले
पत्नी1)सईबाई
2)सोयाराबाई
3)पुतलाबाई
4)काशीबाई
5)सकवरबाई
6)लक्ष्मीबाई
7)सगुनाबाई
8)गुणवंतीबाई
पुत्र1)छत्रपति संभाजी महाराज
2)छत्रपति राजाराम महाराज
3)राजकुंवर बाई
4)बळीबाई
5)कमळाबाई
मुद्राहोन,शिवराई

छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म

शिवाजी महाराज का जन्म महाराष्ट्र के पुना जिल्हे में बसे शिवनेरी किल्ले पर हुआ।शिवनेरी किल्ला पुना के पास जुन्नर गांव के पास बसा है।शिवाजी महाराज जीजाबाई और शहाजी भोसले के दूसरी संतान है। उनसे पहले दोनों को संभाजी नाम का बेटा हुआ था जिनको युद्ध में धोके से मारा गया था।

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छत्रपति शिवाजी महाराज का बचपन

शिवाजी का बचपन लाल महल में गुजरा।लालमहल पुना में स्थित है। शिवाजी ने बचपन से मोघलो, आदिलशाही और निजाम के अत्याचारों को देखा था। उनके मन में इन जुल्मी सुलतानों के प्रति घृणा थी। बचपन से उन्होंने अपनी प्रजा को जुल्मो से आजाद करने का सपना देखा था। बचपन में शिवाजी ने अपने माँ से शिक्षा प्राप्त की। जीजाबाई शिवाजी को रामायण,महाभारत की कहानिया सुनाती थी जिससे प्रेरित होकर शिवाजी ने हिंदवी स्वराज्य स्थापन करने का मन बना लिया था।

 

छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्य विस्तार

छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्य (1630-1680)
  छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्य (1630-1680)

महज सोला साल की उम्र में शिवाजी ने स्वराज्य की प्रतिज्ञा ली। आसपास के किसानों के बच्चों को अपने साथ लेकर शिवाजी ने अपना पहला किल्ला जीता और उसे तोरणा नाम दिया। इस किले को जितने के बाद शिवाजी ने कभी पलटकर नही देखा। बड़ी तेजी के साथ शिवाजी ने अपने स्वराज्य का विस्तार किया और हिंदवी स्वराज्य को सम्पूर्ण महाराष्ट्र में फैला दिया। शिवाजी ने अपने संपूर्ण शासन में तकरीबन 347 दुर्ग जीते थे।

 

छत्रपति शिवाजी का चरित्र

शिवाजी के चरित्र पर उंगली उठाना किसी के लिए संभव नही है।शिवाजी के चरित्र के गुणगान स्वयं उनके दुश्मन भी करते थे। शिवाजी को एक संपूर्ण राजा की रूप में जाना जाता है जिसके प्रमाण इतिहास में मिलते है। शिवाजी ने अपने जीवन में कभी मद्यपान नही किया और वे शाकाहारी भोजन करते थे। आपको बता दे की छत्रपति शिवाजी को मासाहार से चीड़ नही थी, किल्ले पर अंग्रेजी वकीलो के लिए मांसाहार की सुविधा छत्रपति शिवाजी ने खुद की थी।छत्रपति शिवाजी स्त्रियों का सन्मान करते थे। दुश्मन की माँ बेटीयो का अनादर करने पर शिवाजी ने अपने सरदार को मौत की सजा सुनाई थी।अपने कार्यकाल में शिवाजी ने किसानों को लेकर कई कल्याणकारी योजना लागु की थी। किसानों को किसी भी तरह का नुकसान न सहना पड़े इस बात का शिवाजी हमेशा ध्यान रखते थे।

 

छत्रपति शिवाजी महाराज को कैद किया गया

औरंगजेब बादशाह ने शिवाजी महाराज को छल कपट से आगरा में कैद कर लिया। अपने जन्मदिन के अवसर पर औरंगजेब ने शिवाजी को न्योता दिया जिसका आदर करते हुए शिवाजी अपने 9 साल के बेटे संभाजी के साथ आगरा चले गए थे। औरंगजेब ने सबसे के सामने शिवाजी का अपमान किया। जब शिवाजी ने इसके खिलाफ नाराजगी जताई तो शिवाजी को बंदी बनाया गया।कई महीनों की कैद के बाद शिवाजी बड़े ही शातिर तरीके से वहा से निकल गए और किसी को भनक तक नही लगी।

 

शिवाजी महाराज का राज्यभिषेक

छत्रपति महाराज का राज्याभिषेक
    छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक

हिंदवी स्वराज्य के अपने उद्देश्य को पूरा करने के बाद शिवाजी ने 6 जून 1974 को राज्याभिषेक कर लिया। राज्याभिषेक पर काशी से पंडित को बुलाया गया। समारोह में अंग्रेजो के वकील भी शामिल थे। समारोह के बाद शिवाजी,माँ जीजाबाई और उनके गुरु के वजन जितना सोना दान किया गया। राज्यभिषेक के साथ शिवाजी हिंदवी साम्राज्य के पाहिले छत्रपति बने। उन्होंने अपना खुद का मंत्रिमंडल बनाया जिसे ‘अष्टप्रधान’ के नाम से जाना जाता है।शिवाजी ने शिवराई नाम से खुद की मुद्रा चलाई और सभी जाती, धर्म और संप्रदाय के लोगों को अपने राज्य में हक़ से रहने का और भयमुक्त जिंदगी जीने का अधिकार बहाल किया।

शिवाजी महाराज की मृत्यु

शिवाजी महाराज की समाधी
छत्रपति शिवाजी महाराज की समाधी (रायगड)

शिवाजी महाराज की मृत्यु रायगड किल्ले में हुयी। शिवाजी की मृत्यु के बारे में असमंज है। इतिहास में शिवाजी की मृत्यु के बारे कोई ठोस पुरावा मौजूद नही है।कई इतिहासकारो की माने तो शिवाजी की मृत्यु लंबी बीमारी के चलते हुयी तो कुछ इतिहासकार मानते है की उनकी दूसरी पत्नी सोयाराबाई और कुछ मंत्रियों ने मिलकर शिवाजी को जहर दिया था।

 

 

 

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