निर्जला एकादशी व्रत कथा क्या है?

निर्जला एकादशी व्रत कथा

निर्जला एकादशी व्रत कथा

निर्जला एकादशी व्रत कथा का श्रवण ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को करते है.निर्जला एकादशी के व्रत मे पानी पीना वर्जित है इसिलिये इस निर्जला एकादशी कहा जाता है.इस एकादशी को निर्जल उपवास कर शेषशायी भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है.

इस बार निर्जला एकादशी व्रत कथा का श्रवण 13 जून 2019 को गुरुवार के दिन करना चाहिए.

निर्जला एकादशी व्रत कथा की शुरुआत

निर्जला एकादशी व्रत कथा

एक बार जब महर्षि वेदव्यास पांडवों को चारों पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाले एकादशी व्रत का संकल्प करा रहे थे.तब महाबली भीम ने उनसे कहा-

“पितामह!आपने प्रति पक्ष एक दिन के उपवास की बात कही है. मैं तो एक दिन क्या, एक समय भी भोजन के बगैर नहीं रह सकता- मेरे पेट में वृक नाम की जो अग्नि है, उसे शांत रखने के लिए मुझे कई लोगों के बराबर और कई बार भोजन करना पड़ता है. तो क्या अपनी उस भूख के कारण मैं एकादशी जैसे पुण्य व्रत से वंचित रह जाऊंगा?”


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तब महर्षि वेदव्यास ने भीम से कहा- “हे कुंतीनंदन भीम! ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की निर्जला नाम की एक ही एकादशी का व्रत करो और तुम्हें वर्ष की समस्त एकादशियों का फल प्राप्त होगा.नि:संदेह तुम इस लोक में सुख, यश और मोक्ष प्राप्त करोगे”.

यह सुनकर भीमसेन भी निर्जला एकादशी काविधिवत व्रत करने को सहमत हो गए और समय आने पर यह व्रत पूर्ण भी किया.इसलिए वर्ष भर की एकादशियों का पुण्य लाभ देने वाली इस श्रेष्ठ निर्जला एकादशी को पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है.

●◆ निर्जला एकादशी व्रत कथा संपन्न ◆●

नोट:- हमें उम्मीद है आपको अपने सवाल “निर्जला एकादशी व्रत कथा क्या है” का जवाब मिल गया होगा.इस आर्टिकल में लिखी गयी सभी जानकारी को लिखनें मे बेहद सावधानी बरती गयी है.फिर भी किसी भी प्रकार त्रुटि की संभावना से इनकार नही किया जा सकता.इसके लिए आपके सुझाव कमेंट के माध्यम से सादर आमंत्रित हैं.

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