पापांकुशा एकादशी व्रत कथा क्या है ?

पापांकुशा-एकादशी-व्रत-कथा

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

आश्विन शुक्ल एकादशी को पापांकुशा एकादशी व्रत कथा का श्रवण करते है.इस एकादशी को पापों का नाश करने वाली एकादशी कहते है.पापांकुशा एकादशी को विधिपूर्वक भगवान पद्मनाभ की पूजन किया जाता है.पापांकुशा एकादशी के पालन से मनुष्य को मनवांछित फल मिलता है.

इस बार पापांकुशा एकादशी 9 अक्टूबर 2019 को बुधवार के दिन श्रवण करना चाहिए.

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा की शुरुआत

अर्जुन ने कहा- “हे जगदीश्वर! आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या नाम है तथा इस व्रत के करने से कौन से फलों की प्राप्ति होती है? कृपया यह सब विधानपूर्वक कहिए.

भगवान श्रीकृष्ण बोले- “हे कुंतीनंदन! आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पापांकुशा है.इसका व्रत करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं तथा व्रत करने वाला अक्षय पुण्य का भागी होता है.इस एकादशी के दिन इच्छित फल की प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए.इस पूजन के द्वारा मनुष्य को स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है.

हे अर्जुन! जो मनुष्य कठिन तपस्याओं के द्वारा फल की प्राप्ति करते हैं, वह फल इस एकादशी के दिन क्षीर-सागर में शेषनाग पर शयन करने वाले भगवान विष्णु को नमस्कार कर देने से मिल जाता है और मनुष्य को यम के दुख नहीं भोगने पड़ते.

हे पार्थ! जो विष्णुभक्त शिवजी की निंदा करते हैं अथवा जो शिवभक्त विष्णु भगवान की निंदा करते हैं, वे नरक को जाते हैं.


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हजार अश्वमेध और सौ राजसूय यज्ञ का फल इस एकादशी के फल के सोलहवें भाग के बराबर भी नहीं होता अर्थात इस एकादशी व्रत के समान संसार में अन्य कोई व्रत नहीं है.इस एकादशी के समान विश्व में पवित्र तिथि नहीं है.

जो मनुष्य एकादशी व्रत नहीं करते हैं, वे सदा पापों से घिरे रहते हैं.जो मनुष्य किसी कारण वश केवल इस एकादशी का भी उपवास करता है तो उसे यम के दर्शन नहीं होते.इस एकादशी के व्रत को करने से मनुष्य को निरोगी काया तथा सुंदर नारी और धन-धान्य की प्राप्ति होती है और अंतमें वह स्वर्ग को जाता है.

अब में तुम्हें पापांकुशा एकादशी व्रत कथा सुनाता हु,तुम इसका श्रद्धाभावसे श्रवण करो.

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नामक एक बहेलिया रहता था.वह बड़ा क्रूर था.उसका सारा जीवन पाप कर्मों में बीता.जब उसका अंत समय आया तो वह मृत्यु के भय से कांपता हुआ महर्षि अंगिरा के आश्रम में पहुंचकर याचना करने लगा-

“हे ऋषिवर, मैंने जीवन भर पाप कर्म ही किए हैं. कृपा कर मुझे कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे मेरे सारे पाप मिट जाएं और मोक्षकी प्राप्ति हो जाए”.

उसके निवेदन पर महर्षि अंगिराने उसे पापांकुशा एकादशी का व्रत करके को कहा.महर्षि अंगिरा के कहे अनुसार उस बहेलिए ने पूर्ण श्रद्धा के साथ यह व्रत किया और किए गए सारे पापों से छुटकारा पा लिया.

●◆★ पापांकुशा एकादशी व्रत कथा संपन्न ★◆●

नोट:- हमें उम्मीद है आपको अपने सवाल “पापांकुशा एकादशी व्रत कथा क्या है” का जवाब मिल गया होगा.इस आर्टिकल में लिखी गयी सभी जानकारी को लिखनें मे बेहद सावधानी बरती गयी है.फिर भी किसी भी प्रकार त्रुटि की संभावना से इनकार नही किया जा सकता.इसके लिए आपके सुझाव कमेंट के माध्यम से सादर आमंत्रित हैं.

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