बच्चा कैसे पैदा होता है ?

बच्चा कैसे पैदा होता है

बच्चा कैसे पैदा होता है?

हर शादीशुदा जोड़े को माँ बाप बनने की चाहत होती है इसलिए वे बच्चा कैसे पैदा होता है इसकी जानकारी लेते रहते है.बच्चा पैदा करना मुश्किल नही है लेकिन कई बार ऐसी परिस्थितिया बन जाती है की यह काम असंभव सा लगता है.बच्चा पैदा होने में जो दिक्कते आती है इनकी कई वजह हो सकती है.नर या मादा का इनफर्टाइल होना इसकी सबसे प्रमुख वजह है.स्तनधारी जीवों में बच्चा पैदा करने के लिए नर और मादा का सक्षम होना बेहद जरुरी है.

कई बार गर्भ ठहरने के बावजूद महिला को पता ही नही रहता की वह गर्भवती है.इस काल में गलत दवाओं और गलत खानपान की वजह से गर्भपात हो जाता है.ऐसी स्थितियों से बचने के लिए हर जोड़े को बच्चा कैसे पैदा होता है और बच्चे का विकास कैसे होता है इसकी जानकारी होना बेहद जरुरी है.इस आर्टिकल में हम बच्चा कैसे पैदा होता है, भ्रूण का विकास कैसे होता है और डिलीवरी कैसे होती है इसकी जानकारी लेंगे.

बच्चा कैसे पैदा होता है विस्तार में जाने

इंसानी बच्चा कैसे पैदा होता है इसकी प्रक्रिया को हम आसानी से समझने की कोशिश करते है.स्तनधारी जीवो में नर और मादा के मिलन से बच्चा पैदा होने की प्रक्रिया शुरू होती है.मिलन के बाद नर के शुक्राणु और स्त्री के अंडाणु आपस में एकसाथ मिल जाते हैं.इसको ज़ायगोट कहा जाता है.मिलन के लगभग 24 घंटों के बाद यह ज़ायगोट दो हिस्सों में बंट जाता है और इसके बाद यह दुबारा 4,8,16,32,64 कोषो में बंट जाता है. इस प्रकार की प्रक्रिया चलते रहने के अंदर 72 घंटों में इन कोषों का एक बड़ा समूह बन जाता है.

अंडाणु और शुक्राणु के फलित होने से भ्रूण बनने की प्रक्रिया शुरू ही जाती है. फलित ज़ायगोट गर्भाशय में पहुच जाता है.यहा भ्रूण को चारों तरफ से एक झिल्ली लपेटकर अपनी थैली में बंद कर लेती है.इस थैली में एक खास प्रकार का तरल पदार्थ भरा होता है इसी तरल पदार्थ के अंदर भ्रूण तैरता रहता है.इस तरल का तापमान संतुलित रहता है, जिससे भ्रूण अर्थात बच्चे को न तो सुरक्षा मिलती है.


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इस प्रक्रिया को आसान भाषा में समझा जाए तो हम सोना,सुनार,गहना और बैंक का उदाहरण लेते है.इस उदाहरण में मादा के अंडाणु को हम सोना समझ लेते है और नर के शुक्राणु को हम सुनार समझ लेते है.जब सुनार सोने के पास पहुच जाता है तब वह सोने को आकार देता है और एक खुबसूरत गहना बनाता है.अब यह गहना बैंक में जमा कर दिया जाता है.यहाँ गहने का मतलब भ्रूण और बैंक का मतलब गर्भाशय है.गहना बैंक में जमा करने के बाद हमें जिस प्रकार ब्याज मिलता है उसी तरह भ्रूण गर्भाशय में जमा करने के नऊ महीनों बाद हमें उसपर बच्चे के रूप में ब्याज मिलता है.

मुझे आशा है की आपको बच्चा कैसे पैदा होता है इसकी जानकारी मिल गयी होगी.अब जानते है की गर्भ में बच्चे का विकास कैसे होता है.

भ्रूण का विकास और बच्चा कैसे पैदा होता है ?

बच्चा कैसे पैदा होता है गर्भ में भ्रूण का विकास 40 सप्ताह यानि 9 महीनों तक चलता रहता है.इन 9 महीनो में भ्रूण का विकास किस प्रकार से होता है यह जान लेते है.

1 महीना :- पहिले महीने में भ्रूण का कोई अस्तित्व ही नही होता है. इस महीने में केवल गर्भधारणा की प्रक्रिया चलती है.नर मादा के मिलन के बाद अगर मादा को गर्भधारणा के बारे में पता चलने के लिए 1 महीने का वक़्त लग जाता है.इस महीने में महिलाओं के हार्मोन में बदलाव होने लगता है.

2 महीना :- दूसरे महीने के पहले सप्ताह में भ्रूण का आकार रेत के कण जितना होता है.दूसरे सप्ताह में भ्रूण का आकार आधे इंच तक बढ़ जाता है.महीने के आखिर तक बच्चे की धड़कन को अल्ट्रासाउंड की मदत से सुना जा सकता है.

3 महीना :- तीसरे महीने में भ्रूण का विकास तेजीसे होता है.इस महीने में भ्रूण तकरीबन एक इंच जितना लंबा हो जाता है.इसके कारण महिला का पेट बाहर निकलता है.इस महीने में ज्यादातर महिलाओ को खट्टा खाने की इच्छा होने लगाती है.

4 महीना :- गर्भावस्था के तिन महीनो के बाद भ्रूण के तक़रीबन सभी अंग विकसित हो जाते है.भ्रूण की भौवे भी विकसित होने लगती है.भ्रूण माँ के खाने पिने को महसूस करने लगता है.साथ ही भ्रूण गर्भ में हलचल करने लगता है जिसे माँ महसूस कर सकती है.

5 महीना :-इस महीने में भ्रूण के वजन में इजाफा होता है.भ्रूण के सर का आकार बढता है.भ्रूण के बाल भी बढ़ने की शुरुआत होती है.कई बार बच्चा गर्भ में अंगूठा चूसने लगता है.


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6 महीना :-छठा महीना हर माँ के लिए अनोखा अहसास देता है.इस महीने में भ्रूण के हिरडियो का विकास होता है.बच्चा पेट में हरकत करना शुरू कर देता है.कई दफा बच्चा लाथ भी मारने लगता है.

7 महीना :- सातवे महीने में बच्चा पूर्ण रूप से विकसित हो जाता है लेकिन अब भी वह सशक्त नही होता.इस महीने में बच्चे के आँखों का विकास होता है, बच्चा आँख खोलने और बंद करने लगता है.

8 महीना :- इस महीने में बच्चा गर्भ में घूमने लगता है. ज्यादातर बार इस प्रक्रिया का औरत के शरीर पर कुछ खास परिणाम नही होता.लेकिन बच्चे की ज्यादा हलचल से महिला को तकलीफ भी हो सकती है.

9 महीना :- इस महीने में बच्चा पूर्ण तरह से परिपक्व हो जाता है और दुनिया ने आने में लिए तैयार हो जाता है.

गर्भावस्था के नऊ महीनों तक भ्रूण का विकास कैसे होता है इसके बारे में हमने जाना.अब जानते है की डिलीवरी से बच्चा कैसे पैदा होता है.

डिलीवरी से बच्चा कैसे पैदा होता है ?

गर्भावस्था के नऊ माह बाद डिलीवरी की बारी आती है.डिलीवरी के दो प्रकार होते है.एक होती है नार्मल डिलीवरी और दूसरी होती है सिजेरियन डिलीवरी.अब हम जानेंगे की दोनों डिलीवरी में क्या अंतर है? नार्मल और सिजेरियन डिलीवरी से बच्चा कैसे पैदा होता है. साथ में हम फायदे और नुकसान को भी संक्षिप्त में जानेंगे.

नार्मल डिलीवरी से बच्चा कैसे पैदा होता है ?

बच्चा कैसे पैदा होता है आज की तारीख में नार्मल डिलीवरी होना नसीब ही समझा जाता है.नार्मल डिलीवरी में बच्चे का जन्म प्राक्रतिक तरीके से होता है.नार्मल डिलीवरी के दौरान गर्भवती महिला को दर्द होता है इसे लेवर पेन कहते है.मगर दर्द के बावजूद अधिकतर शादीशुदा जोड़े नार्मल डिलीवरी से बच्चे को दुनिया में लाना चाहते है.प्राकृतिक या नार्मल डिलीवरी में गर्भवती महिला को दर्द सहन करना पड़ता है लेकिन इसके बावजूद नार्मल डिलीवरी अपने ही कुछ फायदे है.

नार्मल डिलीवरी के फायदे :-

  • प्राकृतिक या नार्मल डिलीवरी के बाद माँ जल्दी ही स्वस्थ हो जाती है.
  • नार्मल डिलीवरी के बाद दूसरी बार प्रेगनेंट होने में महिला को कोई परेशानी नहीं होती.
  • बच्चे की सेहत तंदरुस्त रहती है और उसे साँस लेंने में तकलीफ नही होती.
  • नार्मल डिलीवरी के बाद महिला होश में रहती है और बच्चे को शुरुआती जरुरी दूध पिला सकती है.

नार्मल डिलीवरी के नुकसान:-

  • प्राकृतिक या नार्मल डिलीवरी का सबसे बढ़ा नुकसान है डिलीवरी के दौरान होने वाला दर्द.
  • नार्मल डिलीवरी के दौरान गर्भवती की हड्डीतोड़ दर्द का सामना करना पड़ता है.
  • कई बार महिला को अधिक स्ट्रेचिंग का सामना करना पड़ता है.
  • बच्चे का आकार बड़ा होने पर नार्मल डिलीवरी के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

सिजेरियन डिलीवरी से बच्चा कैसे पैदा होता है?

बच्चा कैसे पैदा होता है ऑपरेशन के द्वारा बच्चे को माँ के पेट से बाहर निकालने को सिजेरियन डिलीवरी कहते है.सिजेरियन डिलीवरी मैं माँ के पेट के नीचे कट लगा के बच्चे को बाहर निकालते है.सिजेरियन डिलीवरी में माँ को कम दर्द यानि लेवर पेन होता है.आज के तारीख में तकरीबन हर महिला की डिलीवरी सिजेरियन से होती है.सिजेरियन डिलीवरी का प्रमाण शहरी भाग में ज्यादा है.

सिजेरियन डिलीवरी के फायदे :-

  • ऑपरेशन से बच्चा पैदा होने से माँ को दर्द नही सहना पड़ता.
  • सिजेरियन डिलीवरी के कारण डिलीवरी रुकती नही है.
  • बच्चा अड़ जानेपर सिजेरियन डिलीवरी से उसे आसानी से बाहर निकाला जा सकता है.

सिजेरियन डिलीवरी के नुकसान:-

  • ऑपरेशन द्वारा डिलीवरी होने से महिला को स्वास्थ होने में अधिक समय लगता है.
  • बच्चे को शुरुआती दूध पिलाने में देरी होती है.
  • सिजेरियन डिलीवरी में महिला को खून की कमी और संक्रमण का अधिक खतरा होता है.
  • ऑपरेशन के दौरान आंत या मूत्राशय घायल हो सकता है, या खून का थक्का बन सकता है.

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नोट:- हमे उम्मीद है की आपको अपने सवाल “बच्चा कैसे पैदा होता है” का जवाब मिल गया होगा.इस आर्टिकल में लिखी गयी सभी जानकारी को लिखनें मे बेहद सावधानी बरती गयी है.फिर भी किसी भी प्रकार त्रुटि की संभावना से इनकार नही किया जा सकता.इसके लिए आपके सुझाव कमेंट के माध्यम से सादर आमंत्रित हैं.

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