मछली की बारिश क्यों और कैसे होती है ?

मछली की बारिश

मछली की बारिश होना एक प्राकृतिक घटना है. यह घटना एक बार नहीं बल्कि कई बार हुई है और आगे भी होती रहने की पूरी संभावना है.सवाल यह है की यह मछली की बारिश आखिर क्यों और कैसे होती.

मछली की बारिश क्यों और कैसे होती है ?

मछली की बारिश
हवा का शक्तिशाली बवंडर

मछली की बारिश होने का मुख्य कारण हवा का बवंडर होता है.जैसा हमने अक्सर जमीन पर आने वाले बवंडरों में जमींन पे पड़ी हल्की चीज़ों को या कचरे को आकाश की तरफ उठते हुए देखा है. उसी तरह अगर समुंदर में हवा का शक्तिशाली बवंडर बनता है तो बवंडर पानी के साथ समुद्री जीवो को भी आकाश में ले जाता है.जब कोई शक्तिशाली हवा का बवंडर समुद्र तल या नदियों के पास आता है. तो यह पानी के साथ-साथ इसके सतह पर मौजूद कीड़े, मकोड़े,छोटी मछलियों को खींच लेता है. जिससे वह जीव हवा के माध्यम से बादलों में ऊपर तक पहुंच जाते हैं. यह बवंडर पानी के सतह पर भी सक्रिय होता है और हल्के पजीवों को ऊपर खींचता है.यह जीव हवा में तब तक रहते हैं जब तक हवा की गति धीमी नहीं होती.

जब हवा की गति धीमी पड़ती है तब यह बवंडर जहां कहीं आसमान में रहता है वहां इन सारी चीजों को गिरा देता है. बवंडर के उठने और थमने में समय लगता है और इतने में बवंडर कई किलोमीटर की दूरी भी तई कर चुका होता है. इसलिए बवंडर जहां प्रारंभ होता है वहां मछलियों की बारिश होने की संभावना कम होती है. लेकिन मछली की बारिश समुद्र के आसपास होने की संभावना काफी अधिक होती है.

मछली की बारिश के दौरान कैसे जिंदा रहती है मछलिया?

मछली की बारिश
मुम्बई पुना एक्सप्रेस वे पर मछलिया जमा करते लोग

कई बार ऐसा देखा गया है की आसमान से जिंदा मछली की बारिश होती है. यह घटना भी पूरी तरह प्राकृत्तिक है.मछली को जिन्दा रहने के लिए पानी और ऑक्सीजन की जरुरत होती है.मछलिया पानी में मौजूद ऑक्सीजन को लेकर जीवित रहती है. जब भी कोई बड़ा बवंडर समुद्र या नदी के सतह से गुजरता है. तो वह पानी को हवा के साथ साथ पानी भी ऊपर धकेलता है. इसी पानी की वजह से मछलिया कई घंटो तक जीवित रहती है. जब बवंडर शांत होता है तब हलकी बारिश के साथ जिंदा मछली की बारिश होती है.

मछली की बारिश कब और कहा हुयी है ?

मछली की बारिश
बारिश के बाद रस्ते पर मछलिया इकठ्ठा करते लोग

समुंदर या नदी के पास बसे शहरों में मछलीयो की बारिश होना बेहद स्वाभाविक है.भारत में ऐसी घटनाओं के कई सबूत मौजूद है.

  • जुलाई 2016 को महाराष्ट्र के मुंबई पुना एक्सप्रेस वे पर मछलीयो की बारिश हुयी थी. मछली की बारिश देखकर लोग रस्ते पर रुक गए और कई लोगो ने मछलिया जमा कर ली थी.
  • अक्टूबर 2016 को राजस्थान के जयपुर के पास खंसूराजपुर में भारी बरसात के साथ मछलीयो की बारिश हुयी थी.
  • जून 2015 में आँध्रप्रदेश के गोल्लामुण्डि और पल्लागिरि गांव में मछलीयो की बारिश हुयी थी.
  • जुलाई 2010 में वाराणसी के सारनाथ में भारी बारिश के साथ मछलीयो की बारिश हुयी थी.
  • भारत समेत दुनिया के विभिन्न देशो में ऐसी घटनाए होती है. मेक्सिको,पोलैंड, होंदोरुस, ब्राज़ील, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड जैसी देशो में ऐसी घटना के सबुत मिलते है.

मछली की बारिश जैसी घटनाओं पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिकों की मानें तो हर साल लगभग 40 बार विश्व के अनेक जगहों पर मछली की बारिश जैसी घटना देखने को मिलती है.मछली की बारिश की तरह दुनिया के विभिन्न देशो में विविध प्रकार के जीव आसमान के नीचे गिरते हुए देखे गए है. इनमें मछली की बारिश, केकड़े की बारिश,साप की बारिश यहां तक कि मगरमच्छ की बारिश होते हुए देखा गया है.

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