विजया एकादशी व्रत कथा क्या है ?

विजया एकादशी व्रत कथा

विजया एकादशी व्रत कथा

विजया एकादशी व्रत कथा को विजय प्रदान करने वाली एकादशी कहा जाता है.इस एकादशी के व्रत से सुनिश्चित हार को भी जित में बदला जा सकता है.पुराने ज़माने ने राजा महाराजा अपनी जित सुनिश्चित करने के लिए विजया एकादशी का व्रत कर युद्ध पर निकलते थे.धार्मिक कथाओ के अनुसार भगवान राम ने विजया एकादशी के अनुष्ठान की शुरुआत की थी.

इस बार विजया एकादशी 2 मार्च 2019 को शनिवार के दिन है.

विजया एकादशी व्रत कथा की शुरुआत

विजया एकादशी व्रत कथा एक बार नारदमुनि ने ब्रह्माजी से कहा- “हे ब्रह्माजी! आप मुझे फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत और इसकी विधि बताने की कृपा करें.”

ब्रह्माजी बोले- “हे पुत्र! विजया एकादशी का उपवास पूर्व के पाप तथा वर्तमानके पापों को नष्ट करने वाला है. इस एकादशी का विधान मैंने आज तक किसी से नहीं कहा परंतु तुम्हें बताता हूँ, यह उपवास करने वाले सभी मनुष्यों को विजय प्रदान करती है.अब श्रद्धापूर्वक विजया एकादशी व्रत कथा का श्रवण करो.

विजया एकादशी व्रत कथा

श्रीराम को जब चौदह वर्ष का वनवास मिला, तब वह भ्राता लक्ष्मण तथा माता सीता सहित पंचवटी में निवास करने लगे.उस समय महापापी रावण ने माता सीता का हरण कर लिया.इस दुःखद घटना से श्रीरामजी तथा लक्ष्मणजी अत्यंत दुखी हुए और सीताजी की खोज में वन-वन भटकने लगे.जंगल-जंगल घूमते हुए, वे मरणासन्न जटायु के पास जा पहुंचे.जटायु ने उन्हें माता सीता के हरण का पूरा वृत्तांत सुनाया और भगवान श्रीरामजी की गोद में प्राण त्यागकर स्वर्ग की तरफ प्रस्थान किया. कुछ आगे चलकर श्रीराम व लक्ष्मण की सुग्रीवजी के साथ मित्रता हो गई और वहां उन्होंने बालि का वध किया.

श्रीराम भक्त हनुमानजी ने लंका में जाकर माता सीता का पता लगाया और माता से श्रीरामजी तथा महाराज सुग्रीव की मित्रता का वर्णन सुनाया. वहां से लौटकर हनुमानजी श्रीरामचंद्रजी के पास आए और अशोक वाटिका का सारा वृत्तांत कह सुनाया.

सब हाल जानने के बाद श्रीरामचंद्रजी ने सुग्रीव की सहमति से वानरों तथा भालुओं की सेना सहित लंका की तरफ प्रस्थान किया.समुद्र किनारे पहुंचने पर श्रीरामजी ने विशाल समुद्र को घड़ियालों से भरा देखकर लक्ष्मणजी से कहा- “हे लक्ष्मण! अनेक मगरमच्छों और जीवों से भरे इस विशाल समुद्र को कैसे पार करेंगे?”

प्रभु श्रीराम की बात सुनकर लक्ष्मणजी ने कहा- ‘भ्राताश्री! आप पुरुषोत्तम आदिपुरुष हैं. आपसे कुछ भी विलुप्त नहीं है. यहां से आधा योजन दूर कुमारी द्वीप में वकदाल्भ्य मुनि का आश्रम है.वे अनेक नाम के ब्रह्माओं के ज्ञाता हैं.वे ही आपकी विजय के उपाय बता सकते हैं’

अपने छोटे भाई लक्ष्मणजी के वचनों को सुन श्रीरामजी वकदाल्भ्य ऋषि के आश्रम में गए और उन्हें प्रणाम कर एक ओर बैठ गए.अपने आश्रम में श्रीराम को आया देख महर्षि वकदाल्भ्य ने पूछा- “हे श्रीराम! आपने किस प्रयोजन से मेरी कुटिया को पवित्र किया है, कृपा कर अपना प्रयोजन कहें प्रभु!”


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मुनि के मधुर वचनों को सुन श्रीरामजी ने कहा- “हे ऋषिवर! मैं सेना सहित यहां आया हूँ और राक्षसराज रावण को जीतने की इच्छा से लंका जा रहा हूं. कृपा कर आप समुद्र को पार करने का कोई उपाय बताएं. आपके पास आने का मेरा यही प्रयोजन है.”

महर्षि वकदाल्भ्य ने कहा- “हे राम! मैं आपको एक अति उत्तम व्रत बतलाता हूं. जिसके करने से आपको विजयश्री अवश्य ही प्राप्त होगी.’

‘यह कैसा व्रत है मुनिश्रेष्ठ! जिसे करने से समस्त क्षेत्रों में विजय की प्राप्ति होती है?’ जिज्ञासु हो श्रीराम ने पूछा.

इस पर महर्षि वकदाल्भ्य ने कहा- ‘हे श्रीराम! फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का उपवास करने से आप अवश्य ही समुद्र को पार कर लेंगे और युद्ध में भी आपकी विजय होगी. हे मर्यादा पुरुषोत्तम! इस उपवास के लिए दशमी के दिन स्वर्ण, चांदी, तांबे या मिट्टी का एक कलश बनाएं. उस कलश को जल से भरकर तथा उस पर पंच पल्लव रखकर उसे वेदिका पर स्थापित करें.

उस कलश के नीचे सतनजा अर्थात मिले हुए सात अनाज और ऊपर जौ रखें. उस पर विष्णु की स्वर्ण की प्रतिमा स्थापित करें. एकादशी के दिन स्नानादि से निवृत्त होकर धूप, दीप, नैवेद्य, नारियल आदि से भगवान श्रीहरि का पूजन करें. वह सारा दिन भक्तिपूर्वक कलश के सामने व्यतीत करें और रात को भी उसी तरह बैठे रहकर जागरण करें. द्वादशी के दिन नदी या बालाब के किनारे स्नान आदि से निवृत्त होकर उस कलश को ब्राह्मण को दे दें. हे दशरथनंदन! यदि आप इस व्रत को सेनापतियों के साथ करेंगे तो अवश्य ही विजयश्री आपका वरण करेगी.’

मुनि के वचन सुन तब श्रीरामचंद्रजी ने विधिपूर्वक विजया एकादशी का व्रत किया और इसके प्रभाव से राक्षसों के ऊपर विजय प्राप्त की.

●◆★ विजया एकादशी व्रत कथा संपन्न ★◆●

नोट:- हमें उम्मीद है आपको अपने सवाल “विजया एकादशी व्रत कथा क्या है” का जवाब मिल गया होगा.इस आर्टिकल में लिखी गयी सभी जानकारी को लिखनें मे बेहद सावधानी बरती गयी है.फिर भी किसी भी प्रकार त्रुटि की संभावना से इनकार नही किया जा सकता.इसके लिए आपके सुझाव कमेंट के माध्यम से सादर आमंत्रित हैं.

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