अष्टमी 2019 ! ashtami kab hai 2019

ashtami kab hai 2019

प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की अष्ठमी को दुर्गा अष्ठमी मनाई जाती है.अष्टमी को हिंदु धर्म में बेहद शुभ माना जाता है.हर महीने की अष्टमी अलग अलग तारीख को होती है.इसलिए अष्टमी की तारीख को याद रख पाना मुश्किल हो जाता है.इसलिए लोग अपने कैलेंडर पर अष्टमी की तारीख को नोट करके रखते है.कुछ लोग इंटरनेट पर ashtami kab hai 2019 सर्च करते है.मान्यता है की इस दिन माँ दुर्गा की विधि विधान के साथ पूजा करने से सभी इच्छा पूर्ण होती है.


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दुर्गाष्टमी हर महीने आती है इसलिए इसे मासिक दुर्गाष्टमी कहा जाता है और नवरात्री के दौरान आनेवाली अष्टमी को महाअष्टमी या दुर्गाष्टमी कहा जाता है.इस आर्टिकल में हमने इस साल आनेवाली मासिक दुर्गाष्टमी और महाअष्टमी की तारीख एकसाथ लिखकर राखी है ताकि आपको (ashtami kab hai 2019) को बार बार खोजने की जरुरत नही पड़ेगी.साथ ही हम दुर्गाष्टमी पूजा की विधि भी जानेंगे.

अष्टमी कब है 2019 – ashtami kab hai 2019

इस साल की सभी अष्टमीयो की तारीख निचे दी गयी है.इस साल महाअष्टमी यानि नवरात्री के दौरान आनेवाली दुर्गाष्टमी 6 अक्तूबर 2019 रविवार के दिन है.

14 जनवरी 2019 – सोमवार
13 फरवरी 2019 – बुधवार
14 मार्च 2019 – गुरुवार
13 अप्रैल 2019 – शनिवार
12 मई 2019 – रविवार
10 जून 2019 – सोमवार
09 जुलाई 2019 – मंगलवार
08 अगस्त 2019 – गुरुवार
06 सितंबर 2019 – शुक्रवार
06 अक्टूबर 2019 – रविवार (दुर्गा अष्टमी)
04 नवंबर 2019 – सोमवार
04 दिसंबर 2019 – बुधवार

दुर्गाष्टमी पूजा विधि – ashtami kab hai 2019

ashtami kab hai 2019

इस दिन सबसे पहले शुद्ध जल से स्नान कर साफ कपडे पहनें.माँ दुर्गा की पूजा करने के लिए पहले आपको अपने हाथों में लाल पुष्प लेकर माँ दुर्गा की प्रतिमा को अर्पित करना चाहिये.फिर आपको कपूर, दीया, धूपबत्ती प्रज्वलित कर और आरती के साथ माता दुर्गा की पूजा करनी चाहिए.दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए तथा भगवती दुर्गा के मंत्रोच्चार करने चाहिये.माँ को मिष्ठान्न अर्पित कर माँ के नामों का उच्चारण करना चाहिये.

माँ दुर्गा को पंचामृत अर्पित करना चाहिये जो शहद, दही, घी, गंगाजल और दूध इन पांच पवित्र अवयवों द्वारा बनाया जाता है.माँ को पांच फल व किशमिश, सुपारी, पान, लौंग, इलायची आदि अर्पित करने चाहिये.अंत में घी के दिये से माँ की आरती करनी चाहिए.आरती के बाद आपको नौ छोटी कन्याओं को बुलाकर उनके पैरों को पानी से धोना चाहिए और उनके लिए पूरी और हलवा प्रसाद के रूप में भोजन कराना चाहिये.इसके बाद इन कन्याओं के पैर छूकर इनसे आशीर्वाद लेना चाहिये क्योंकि ये नौ कन्यायें नवदुर्गा का रूप होती हैं.

दुर्गाष्टमी की पौराणिक कथा – ashtami kab hai 2019

प्राचीन समय में दुर्गम नामक एक दुष्ट और क्रूर दानव रहता था, वह बहुत ही शक्तिशाली था, अपनी क्रूरता से उसने तीनों लोकों में अत्याचार कर रखा था. उसकी दुष्टता से पृथ्वी, आकाश और ब्रह्माण्ड तीनों जगह लोग पीड़ित थे. उसने ऐसा आतंक फैलाया था, कि आतंक के डर से सभी देवता कैलाश में चले गए, क्योंकि देवता उसे मार नहीं सकते थे, और न ही उसे सजा दे सकते थे. सभी देवता ने भगवान शिव जी से इस बारे में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया.

अंत में विष्णु, ब्रह्मा और सभी देवता के साथ मिलकर भगवान शंकर ने एक मार्ग निकाला और सबने अपनी उर्जा अर्थात अपनी शक्तियों को साझा करके संयुकत रूप से शुक्ल पक्ष अष्टमी को देवी दुर्गा को जन्म दिया. उसके बाद उन्होंने उन्हें सबसे शक्तिशाली हथियार को देकर दानव के साथ एक कठोर युद्ध को छेड़ दिया, फिर देवी दुर्गा ने उसको बिना किसी समय को लगाये तुरंत दानव का संहार कर दिया. वह दानव दुर्ग सेन के नाम से भी जाना जाता था. उसके बाद तीनों लोकों में खुशियों के साथ ही जयकारे लगने लगे, और इस दिन को ही दुर्गाष्टमी की उत्पति हुई. इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत हुई.

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नोट:- हमें उम्मीद है आपको आपके सवाल “ashtami kab hai 2019” का जवाब मिल गया होगा.इस आर्टिकल में लिखी गयी सभी जानकारी को लिखनें मे बेहद सावधानी बरती गयी है.फिर भी किसी भी प्रकार त्रुटि की संभावना से इनकार नही किया जा सकता.इसके लिए आपके सुझाव कमेंट के माध्यम से सादर आमंत्रित हैं.

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