बुराड़ी कांड क्या है ? Burari kand kya hai

Burari kand kya hai

Burari kand kya hai ?-बुराड़ी कांड क्या है?

Burari kand kya hai -1 जुलाई 2018 को उत्तरी दिल्ली के करीब बसे बुराड़ी इलाके में एक ही परिवार के 10 लोगों की लाशे सीलिंग से लटकी हुयी मिली थी.और एक बुजुर्ग महिला की लाश बगल के कमरे में खुर्सी पर मिली थी.घर के पालतू कुत्ते को घर के टेरिस पर बांधकर रखा गया था.पुलिस की शुरुआती जाँच में परिवार के सामूहिक आत्महत्या करने की बात सामने आयी थी.

Burari kand kya hai ? – कौन था भाटिया परिवार?

बुराड़ी कांड में दिल्ली के चूंडावत परिवार के 11 लोगो की लाशे मिली थी.पडोसी इस परिवार को भाटिया नाम से जानते थे.भाटिया परिवार मूल रूप से राजस्थान का है. 20 सालों पहले यह परिवार राजस्थान से दिल्ली आ गया था.दिल्ली में परिवार ग्रोसरी की दुकान चलाता था.साथ ही भाटिया परिवार का प्लाईवुड का बिज़नस था.भाटिया परिवार का दो मंजिला मकान है.निचे ग्रोसरी का दुकान और ऊपर परिवार रहता था.

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चूंडावत – भाटिया परिवार के सदस्य

भाटिया परिवार के सदस्य

भाटिया परिवार में कुल 11 सदस्य थे. जिनमे 75 साल की नारायणी देवी सबसे बुजुर्ग थी.नारायणी देवी के पति भोपाल सिंह की मौत 2007 में हुयी थी.नारायणी देवी को दो बेटे, दो बहु,एक बेटी, दो पोते और 3 पोतियां थी.

  • नारायणी देवी (75 साल)
  • भवनेश चूंडावत (50 साल) – नारायणी देवी का बड़ा बेटा
  • सविता भवनेश चूंडावत (48 साल) -भवनेश चूंडावत की पत्नी
  • नीतू भवनेश चूंडावत(25 साल) – भवनेश चूंडावत की बड़ी बेटी
  • मेनका भवनेश चूंडावत (23 साल)- भवनेश चूंडावत की छोटी बेटी
  • ध्रुव भवनेश चूंडावत (15 साल)- भवनेश चूंडावत का बेटा
  • ललित चूंडावत (45 साल) – नारायणी देवी का छोटा बेटा
  • टीना ललित चूंडावत (42साल) -ललित की पत्नी
  • शिवम ललित चूंडावत (15 साल)- ललित का बेटा
  • प्रतिभा (57 साल)- नारायणी देवी की बेटी
  • प्रियंका (33 साल) – प्रतिभा की बेटी
  • टॉमी – चूंडावत परिवार का कुत्ता

Burari kand kya hai? – कैसे मिली लाशे ?

भाटिया परिवार के कुछ सदस्य रोज सुबह टहलने निकलते थे.करीब 6 बजे भाटिया परिवार अपना दुकान खोलता था.1 जुलाई 2018 को भाटिया परिवार के पडोसी गुरुचरण सिंह सुबह टहलने निकले थे.तब उन्हें भाटिया परिवार की गैरमौजूदगी खली.गुरुचरण सिंह भाटिया परिवार के दुकान के पास पहुचे,तब उनकी दुकान बंद थी.बंद दुकान को देखकर गुरुचरण उनके घर की तरफ गए. वहा उन्हें भाटिया परिवार के 10 सदस्यों की लाशे घर के छत पे बनी लोहे की जाली से लटकती हुयी दिखी.इस दृश्य को देख गुरुचरण घबरा गए और उन्होंने आजूबाजू के पड़ोसियों को बुलाया.पड़ोसियों ने सुबह के करीब 7.30 बजे पुलिस को जानकारी दी.

पुलिस की जाँच के दौरान भाटिया परिवार के पड़ोसियों ने बताया की,भाटिया परिवार बेहद शांत था.उनके सबके साथ अच्छे संबंध थे.भाटिया परिवार के लोग भगवान को बेहद मानते थे और बड़े धार्मिक स्वाभाव के थे. उनके परिवार में हमेशा भजन, किर्तन का कार्यक्रम चलता रहता था.दोनों भाई भवनेश और ललित हर रोज भगवांन के मंदिर जाकर पूजा करते थे.पूजा करने के बाद ही वे दुकान खोलते थे.भाटिया परिवार का किसी के साथ कोई बैर नही था.

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ललित की डायरी में लिखी अनुष्ठान की विधि

Burari kand kya hai – पुलिस की शुरुआती जाँच

पुलिस की जाँच में पाया गया की,परिवार के सभी सदस्यों के हाथ और पैर बांधे हुए थे. सभीके मुँह को भी कपडे से बंद कर दिया गया था.साथ ही सभी सदस्यों के चेहरे को बेडशीट के कपडे से लपेटा गया था.सिर्फ ललित और उनकी पत्नी टीना के हाथ बंधे नहीं थे.नारायणी देवी का शव बगल के कमरे में खुर्सी पर मिला.आशंका थी के उनकी हत्या की गयी थी.
पुलिस को कमरे में धार्मिक किताबे मिली.साथ ही कमरे में ललित की डायरी मिली. इस डायरी में कुछ धार्मिक अनुष्ठान के बारे में लिखा गया था.इस डायरी की वजह से पुलिस को शक हुआ की, परिवार के लोगों ने सामूहिक आत्महत्या की थी.

Burari kand kya hai – ललित का पिता के आत्मा पर पूर्ण विश्वास था

दिल्ली पुलिस ने भाटिया परिवार के धार्मिक अनुष्ठानों के बारे में गहराई से जाँच की.जाँच में पाया गया की, नारायणी देवी का छोटा बेटा ललित चूंडावत अंधविश्वासी था.ललित पर भूतप्रेत, पुनर्जन्म जैसी बातों का प्रभाव था.कुछ सालो पहले एक दुर्घटना में ललित की आवाज़ चली गयी थी.हॉस्पिटल और दवा के बाद भी ललित की आवाज नही लौटी.लेकिन कुछ महीनों बाद चमत्कारीक ढंग से ललित की आवाज़ वापस आयी.जब उससे पूछा गया की ऐसा कैसे हुआ.तब ललित ने अपने मरे हुए पिता भोपाल सिंह का नाम लिया.ललित ने बताया की, भोपाल सिंह ने उसकी आवाज वापस की है.भोपाल सिंह की आत्मा उसके साथ बात करती है.लोगों को इस बात पर विश्वास नही हुआ.लेकिन घरवालो को ललित की बात पर विश्वास हो गया.

इस वाकया के बाद ललित अपने परिवार को पिता के आत्मा के बारे में बताता था.ललित परिवार वालो से एक अनुष्ठान करने के बारे में भी कहा करता था.ललित अपनी डायरी में सब लिखकर रखता था.ललित ने परिवार वालो से कहा की पिता की आत्मा के लिए उन्हें एक अनुष्ठान करना होगा. इस अनुष्ठान में सबको छतसे लटककर फाँसी लेनी थी.ललित ने परिवारवालो को भरोसा दिलाया की,फाँसी लेने के बावजूद किसी की मौत नही होगी.पिता की आत्मा उन्हें बचा लेगी.इस अनुष्ठान के बाद उन्हें नई ऊर्जा मिलेगी.

Burari kand kya hai – ललित ने करवाया था अनुष्ठान

ललित के कहने पर परिवार के सारे सदस्य राजी हो गए.परिवार ने रात को अनुष्ठान किया.अपने पालतू कुत्ते टॉमी को घर के छत पर बाँध कर रखा गया.बुजुर्ग नारायणी देवी स्टूल पर खड़ी नही रह सकती थी.इसलिए नारायणी देवी की हत्या की गयी.बादमे ललित और उसकी पत्नी टीना ने सबके हाथ पैर बांध दिए.सबके आँखो पर पट्टी बांधी गयी ताकि कोई भी एकदूसरे को तड़पता हुआ ना देख सके.सबके मुह पर बेडशीट के टुकड़े को लपेटा गया.बादमे ललित और टीना के साथ साथ सब लोग एकसाथ फंदे पर झूल गए.

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भाटिया परिवार का कुत्ता “टॉमी”

ललित को विश्वास था की उसके मृत पिता की आत्मा उन सबको बचा लेगी.लेकिन ऐसा होना नही था.अंधविश्वास के चलते एक ही परिवार के 11 लोगों की जान चली गयी.भाटिया परिवार का पालतू कुता जब पुलिस के हाथ लगा तब उसे बेहद तेज बुखार था.अपने परिवार की मौत का शायद उस कुत्ते को भी सदमा लगा था.22 जुलाई 2018 को हार्टअटैक की वजह से टॉमी की मौत हो गयी.

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