ईबुक क्या होता है? Ebook kya hai ?

Ebook kya hai

Ebook kya hai – ईबुक क्या होता है?

Ebook kya hai -ईबुक का मतलब इलेक्ट्रॉनिक बुक होता है.ईबुक पारंपारिक किताबों का डिजिटल स्वरुप है.

पारंपारिक किताबो की तरह ईबुक का कोई भौतिक स्वरुप नही होता.यानी ईबुक में कागज का इस्तेमाल नही होता और नाही शाई का इस्तेमाल होता है.ईबुक को पढने के लिए मोबाइल,कंप्यूटर, लैपटॉप या ईबुक रीडर का इस्तेमाल करना पड़ता है.

Ebook kya hai – ईबुक के खोजकर्ता

ईबुक की शुरुआत या खोज किसने की इसपर इतिहासकारो में संभ्रम है.लेकिन ईबुक के इतिहास में निचे बताए हुए नाम काफी लोकप्रिय है.

एंजेला रोबल्स (1949)

साल 1949 में स्पेन की एक शिक्षिका एंजेला रोबल्स ने एक मशीन बनायीं थी.इस मशीन में अक्षरों और तस्वीरों को डिजिटल फॉर्म में बदला जा सकता था.एंजेला ने इस मशीन का पेटेंट भी अपने नाम करवाया था.इस मशीन में एक घूमनेवाली चकरी पर चित्र और अक्षर रखे जाते थे.एंजेला ने यह मशीन अपने स्टूडेंट के लिए बनायीं थी.ताकि उनके स्टूडेंट को किताबों का बोज़ न सहाना पढ़े और एक ही मशीन में सारी किताबे रखी जा सके.बादमे एंजेला ने इस मशीन में मैग्नीफाइंग ग्लास,कैल्क्युलेटर, ऑडियो रिकॉर्डर और एक बल्ब भी लगाया. ताकि इस मशीन का इस्तेमाल रात में किया जा सके.उस वक़्त एंजेला की इस मशीन में किसीने दिलचस्पी नही दिखाई और इस मशीन का बड़े पैमाने पर उत्पादन नही हुआ.

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अपने किताबों के साथ रोबर्ट बुसा

रोबर्ट बुसा (1949-1970)

रोबर्ट बुसा के द्वारा थॉमस अक्विन्स के कार्यों पर लिखी एक सूचि को ईबुक माना जा सकता है.इस सूचि को एक कंप्यूटर में संजोया गया.आज की ईबुक की तरह इस ईबुक को भी एक से दूसरे कम्प्यूटर में भेजा जा सकता था.

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अंडरीज वैन डैम

अंडरीज वैन डैम (1960)

इतिहासकारो की माने तो ईबुक की शुरुवात 1960 के दौर में शुरू हुयी थी.अंडरीज वैन डैम ही वे शख्स है, जिन्होंने ईबुक शब्द का पहली बार इस्तेमाल किया.अंडरीज ब्राउन यूनिवर्सिटी में (FRESS) “फ़ाइल रेट्रीविंग एंड एडिटिंग सिस्टम” पर काम कर रहे थे.यह प्रोजेक्ट एक तरह का डॉक्यूमेंट था,जो आईबीएम मशीन पर चलने वाला था. यह प्रोजेक्ट सही मायने में ईबुक की तरह काम करता था.इस डॉक्यूमेंट को अलग अलग कंप्यूटर पर चलाया जा सकता था.इस डॉक्यूमेंट में अलग अलग तरह के शब्द,तस्वीरों,सांकेतिक चिन्हों और टेबल को इस्तेमाल किया गया था.

Michael hart
माइकल हार्ट

माइकल हार्ट (1971)

आधुनिक ईबुक का जनक माइकल हार्ट को कहा जाता है. माइकल हार्ट ने सन 1971 में ईबुक का सुधारित रूप बनाया.माइकल हार्ट ने सबसे पहले “अमेरिका के स्वतंत्रता का घोषणापत्र” को ईबुक में बदला. इस ईबुक को अलग अलग डिवाइस में पढ़े जाने के लिए बनाया गया.बादमे “प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग” की तर्ज पर ईबुक को बड़े पैमाने पर बनाने की शुरुआत हुयी.

Ebook kya hai – ईबुक का प्रसार

सन 1998 के दौर में अमेरिका की कुछ लाइब्ररी ने अपने कस्टमर को ईबुक सेवा देनी शुरू कर दी थी.लाइब्ररी अपने वेबसाइट की माध्यम से कस्टमर को ईबुक सेवा प्रधान करते थे.यह सेवा मुफ़्त होती थी.लेकिन उस वक़्त ज्यादा किताबे ईबुक के रूप में उपलब्ध नही थी.जो किताबे थी,वह केवल टेक्निकल या प्रोफेशनल थी.यानी केवल रिसर्च पेपर ही ईबुक के रूप में उपलब्ध हुआ करती थी.

साल 2003 तक बड़े पैमाने में हर तरह की किताबों को ईबुक के स्वरुप में बदला गया.अब लाइब्ररी अपनी ईबुक को किराये पर देने लगी थी.किताबो का यह स्वरुप लोगों को बेहद पसंद आया.तबसे ईबुक की मांग बढती गयी.

Ebook kya hai -ईबुक की लोकप्रियता

डिजिटल ईबुक की लोकप्रियता हर मोर्चे पर पारंपारिक किताबों पर भारी पड़ रही है.ईबुक की बढती लोकप्रियता का कारण इसकी सहज होती उपलब्धता है.

ईबुक पूरी तरह से पोर्टेबल है यानी ईबुक को बिना किसी मुश्किल से यहॉ से वहा ले जाया जा सकता है. ईबुक को किसी दुकान में जाकर खरीदने की जरुरत नहीं पड़ती है.

ईबुक को घर बैठे मोबाइल या अन्य किसी डिवाइस से इंटरनेट के माध्यम से ख़रीदा जा सकता है.ईबुक आपके घर या अलमारी में जगह नही लेती.इसे अपने मोबाइल डिवाइस में संजोकर रखा जा सकता है.

एक पारंपारिक लाइब्ररी में जितनी किताबे होती है. उतनी किताबें आप अपने डिवाइस में ईबुक के रूप में रख सकते है.पारंपारिक किताबों को पढने के लिए उजाले की जरुरत होती है.वही ईबुक को दिन या रात कभी भी पड़ा जा सकता है.

Ebook kya hai – ईबुक का बढता मार्केट

कम कीमतों और कही भी और कभी भी पढने की आझादी के कारण ईबुक का मार्केट लगातार बढ़ रहा है.साल 2003 से 2018 तक ईबुक का मार्केट शेयर लगातार बढता हुआ दिख रहा है.

  • भारत में ईबुक पढने वालो की तादात 2.9% है.अनुमान है की यह तादात 2022 तक 4.5% हो जायेगी.
  • अमेरिका में ईबुक पढने वालो की तादात 30% है.
  • चीन में ईबुक पढने वालो की तादात 1% है.
  • ब्राज़ील में ईबुक पढने वालो की तादात 2.5% है.
  • स्पेन में ईबुक पढने वालो की तादात 15% है.
  • इंग्लैंड में ईबुक पढने वालो की तादात 29% है.
  • जर्मनी में ईबुक पढने वालो की तादात 5.2% है.
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अमेज़न किंडल

Ebook kya hai -ई-रीडर की बढती संख्या

ईबुक की बढती लोकप्रियता और बढते मार्केट में ई-रीडर की मुख्य भूमिका है.ई-रीडर एक ऐसा डिवाइस है जिसके माध्यम से ईबुक को सुरक्षित रूप से ख़रीदा और सँजोया जा सकता है.

ईबुक की बढती माँग की वजह से ई-रीडर मार्केट में जंग शुरू हो गयी है. फ़िलहाल अमेज़न किंडल, सोनी रीडर, कोबो ई-रीडर,एप्पल आईपैड, न्यूक टेबलेट इत्यादि ई-रीडर लोकप्रिय है.

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