निकाह हलाला क्या होता है ? Halala kya hota hai

Halala kya hota hai

Halala kya hota hai – निकाह हलाला क्या है ?

Halala kya hota hai – निकाह हलाला इस्लाम में अपनायी जानेवाली एक प्रथा है. यह प्रथा ज्यादातर सुन्नी मुसलमानों में मानी जाती है. निकाह का मतलब शादी और हलाला का मतलब जायज होता है.

अगर मुस्लिम महिला और मुस्लिम पुरुष के बिच तलाक होता है. तलाक के बाद दोबारा शादी करना चाहे तो महिला को पहले किसी दूसरे पुरुष के साथ निकाह करना होगा. इस दूसरे शख्श के साथ महिला को शारीरिक संबंध बनाने पढ़ते है. इसके बाद जब दूसरा पुरुष महिला को तलाक दे देगा, तभी महिला अपने पहले पति से दोबारा शादी कर सकती है.

“अल बकरा 2.230 के हिसाब से अगर कोई मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को तिन बार तलाक देता है यानि ट्रिपल तलाक देता है.तो यह माना जाता है की वह महिला अपने पती के प्रती वफादार नही है”.ऐसे में वह दोनों फिरसे शादी नही कर सकते. इसलिए दोनों को फिरसे शादी करने के लिए ,महिला को किसी दूसरे पुरुष से निकाह कर उसके साथ शारिरिक संबंध बनाने पढ़ते है. शारीरिक संबंध बन जाने के बाद, महिला अपने दूसरे पती से तलाक लेती है और अपने पहिले पती से शादी करती है.

Halala kya hota hai – इस्लाम में निकाह हलाला की परिभाषा

इस्लाम के विद्वान इस प्रक्रिया को पूरी तरह से गैर-इस्लामी मानते है.साथ ही जो लोग इस तरह महिलाओं का शोषण करते हैं वह इस्लाम की नज़र में पापी हैं और इन्हें उसकी सजा मिलेगी.

ईबन् मजह में लिखा है की,मोहम्मद पैगंबर ने निकाह हलाला को हराम बताया है. पैग़म्बर कहते है,”अल्लाह मुहाल्लील और मुहाल्लाल लहू दोनों को सजा देगा”. इसमें मुहाल्लाल लहु महिला का पति है जिसने तलाक देकर अपनी बीवी को छोडा था.वही मुहल्लील वह दुसरा शख्श है जो निकाह हलाला करता है.

अब्द अल रजाक में लिखा है,” मुहल्लील और मुहाल्लाल लहु दोनों का इंसाफ अल्लाह करेंगे. दोनों को पत्थर मारे जायेंगे”.

Halala kya hota hai – भारत में निकाह हलाला को लेकर विवाद

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सनीमा बेगम

भारतीय सुप्रीम कोर्ट में 9 मार्च 2018 को समीना बेगम ने निकाह हलाला और बहुविवाह प्रथा के खिलाफ याचिका दायर की थी.इस याचिका में समीना बेगम ने निकाह हलाला को गैर इस्लामी बताया था.

समीना बेगम ने अपनी बात रखते हुए कहा की इस प्रथा के माध्यम से महिलाओं शारीरिक शोषणकिया जाता है.कुछ मुस्लिम धर्मगुरु महिलाओं को जहन्नुम में जाने का डर दिखाकर और इस्लाम के नाम पर गलत जानकारियां देकर गुमराह करते हैं.ताकि महिलाओं का शोषण किया जा सके.

इस याचिका पर 26 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था. अब केंद्र सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को यह भरोसा दिलाया है.सरकार जल्द से जल्द सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी ताकि मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ मिल सके.

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