इंकॉग्निटो मोड़ क्या है ? Incognito mode kya hai ?

Incognito mode kya hai

Incognito mode kya hai ? इंकॉग्निटो मोड़ क्या है ?

Incognito mode kya hai – इंकॉग्निटो मोड को प्राइवेसी मोड या प्राइवेट ब्राउज़िंग कहा जाता है. साथ ही इंकॉग्निटो मोड को गोपनीय या गुप्त ब्राउज़िंग कहा जा सकता है.इंकॉग्निटो मोड वेब ब्राउज़र द्वारा दियी जानेवाली एक ऐसी सुविधा है.जिसके मदत से यूजर अपनी ब्राउज़िंग को गुप्त रख सकता है.साथ ही अपनी गोपनीय जानकारी लोगों से छुपा कर सुरक्षित ढंग से ब्राउज़िंग कर सकता है.

Incognito mode kya hai – इंकॉग्निटो मोड का इतिहास

Incognito mode kya hai ?
सफारी ब्राउज़र का लोगो

इंकॉग्निटो मोड की शुरुआत सबसे पहले एप्पल कंपनी ने की.एप्पल कंपनी द्वारा बनाया गया “सफारी ब्राउज़र” में इंकॉग्निटो मोड का सबसे पहले इस्तेमाल किया गया.

  • 29 अप्रैल 2005 को “सफारी 2.0” ब्राउज़र में “प्राइवेट ब्राउज़िंग” के नाम से इस सुविधा की शुरुआत की गयी थी.
  • इसके बाद 11 दिसंबर 2008 को गूगल ने “गूगल क्रोम” ब्राउज़र में इंकॉग्निटो मोड का फीचर जोड़ दिया.
  • 19 मार्च 2009 में माइक्रोसॉफ्ट के इंटरनेट एक्सप्लोरर ने “इनप्राइवेट ब्राउज़िंग” नाम से इस सुविधा की शुरुआत की.
  • 30 जून 2009 में मोज़िला ने अपने उपभोक्ताओ को प्राइवेट ब्राउज़िंग की सुविधा मुहैया करवाई.
  • 2 मार्च 2010 में ओपेरा ब्राउज़र इन प्राइवेट विंडो के नाम से इंकॉग्निटो की सुविधा मुहैया कराई.
  • 18 नवम्बर 2014 में अमेज़न ने अपने ब्राउज़र “अमेज़न सिल्क” में इंकॉग्निटो मोड़ को मुहैया करवाया.
  • 29 जुलाई 2015 को माइक्रोसॉफ्ट एज में प्राइवेट ब्राउज़िंग के तौर पर इंकॉग्निटो मोड़ की शुरुआत की.
  • 10 जुलाई 2018 को गूगल ने यूट्यूब मोबाइल एप्लीकेशन में इंकॉग्निटो मोड की सुविधा मुहैया करवाई.

Incognito mode kya hai – इंकॉग्निटो मोड काम कैसे करता है?

इंकॉग्निटो मोड भी आम ब्राउज़िंग की तरह ही होता है. बस इसमे आपकी पर्सनल जानकारी सेव यानि जमा नही रहती.

आमतौर पर जब हम इंटरनेट पर ब्राउज़िंग करते है.तब हम जिस भी वेबसाइट को इंटरनेट पर देखते है. उसकी हिस्टरी, कूकी,कैच आपके ब्राउज़र में जमा हो जाता है.और ऐसे में अगर आपका मोबाइल या कंप्यूटर कोई अन्य व्यक्ति देखता है. तो इस हिस्ट्री की मदत से वो व्यक्ति हमने इंटरनेट पर कौनसी कौनसी वेबसाइट को देखा है.उसकी जानकारी आसानी से देख सकता है.

मान लीजिए अगर आप पब्लिक इंटरनेट कैफ़े में जाकर फेसबुक,इंस्टाग्राम या ट्विटर जैसी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते है.तब वहा के कंप्यूटर में आपकी हिस्ट्री,लोगिन आईडी और पासवर्ड सेव हो जायेगा.और अगर कोई चाहे तो आसानी से आपके लोगिन पासवर्ड के जरिए आपकी सोशल मीडिया का अकाउंट देख या हैक कर सकता है.

लेकिन अगर यही काम हम इंकॉग्निटो मोड पर करते है. तो हमारी ब्राउज़िंग हिस्ट्री,यूजर आईडी या पासवर्ड इंकॉग्निटो मोड़ में सेव नही होता है.किसी और के द्वारा हमारी ब्राउज़िंग हिस्ट्री या लोगिन पासवर्ड देखने की गुंजाईश ना के बराबर होती है.

इस में ध्यान देने वाली बात यह है की,इंकॉग्निटो मोड़ में कियी जानेवाली ब्राउज़िंग की जानकारी किसी आम अन्य यूजर को नही होती.लेकिन आपके (ISP) इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को आपकी ब्राउज़िंग की हर जानकारी रहती है.इसलिए इंकॉग्निटो मोड में ऐसा कोई भी काम ना करे जो क़ानूनी तौर से गलत हो.सरकार और साइबर पुलिस की नजर हरवक्त आपपर बनी रहती है.

Incognito mode kya hai – इंकॉग्निटो मोड का इस्तेमाल कब करे ?

Incognito mode kya hai ?
यूट्यूब ने शुरू की इंकॉग्निटो सुविधा
  • इंकॉग्निटो मोड का इस्तेमाल कब करना चाहिए इसके बारे में जान लीजिए.
  • एक ही वक़्त अलग अलग ईमेल अकाउंट लोगिन करते समय इंकॉग्निटो मोड का इस्तेमाल किया जा सकता है.
  • दुसरों के मोबाइल या कंप्यूटर से सोशल मीडिया इस्तेमाल करते वक़्त इंकॉग्निटो मोड़ का इस्तेमाल करना चाहिए.
  • ऑनलाइन पेमेंट करते समय इंकॉग्निटो मोड़ का इस्तेमाल करना चाहिए.
  • कुछ लोग ऑनलाइन होटल बुकिंग करते समय इंकॉग्निटो मोड़ का इस्तेमाल करते है.
  • सर्च हिस्ट्री और कैच की वजह से ब्राउज़र धीमा पड जाता है. ऐसे में टेम्पररी ब्राउज़िंग के समय इंकॉग्निटो मोड़ का इस्तेमाल करना चाहिए.
  • यूट्यूब पर उटपटांग वीडियो देखते समय भी इंकॉग्निटो मोड़ का इस्तेमाल किया जा सकता है.
  • ज्यादातर लोग इंटरनेट पर पोर्न देखते समय इंकॉग्निटो मोड का इस्तेमाल करते है.
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