जेपीसी क्या है ? jpc kya hai

कई बार संसद में जेपीसी की मांग उठती है.लोकसभा और राज्यसभा में बहस के दौरान कई बार जेपीसी के गठन करने पर हंगामा होता है.जेपीसी मुद्दे को ज्यादातर बार विपक्ष ही उठाता है.अब सवाल यह है की आखिर यह जेपीसी होता क्या है ( jpc kya hai ).क्या ये किसी प्रकार का प्रावधान है,कानून है,संघटन है या फिर सिर्फ एक कमिटी है.

अगर आपको नही पता आखिर यह जेपीसी होती क्या है तो आप सही जगह पोहंचे है.इस आर्टिकल में हम जेपीसी के बारे में कुछ जानकारियां आपके सामने रखने वाले है. जिन्हें पढ़कर आपको जेपीसी क्या है, जेपीसी का गठन क्यों होता है और जेपीसी का गठन कब कब हुआ है इसका जवाब मिल जायेगा.

जेपीसी क्या होता है – jpc kya hai

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जेपीसी का फुलफॉर्म होता है जॉइंट पार्लिमेंट कमिटी (Joint Parliament Committee).जेपीसी को मिनी संसद भी कहा जाता है.जब भी किसी मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बिच मतभेद होता है तब तब जेपीसी की मांग उठती है.अगर विपक्ष को लगता है की सरकार ने किसी सौदे में गैर व्यवहार किया है या फिर भ्रस्टाचार किया है तब विपक्ष इस व्यवहार की जाँच करने के लिए जेपीसी गठन करने के लिए कहता है.


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जेपीसी एक तरह की समिति होती है.जिसमे सरकार,विपक्ष और अन्य दलो के चुनिंदा सांसद होते है.यह सब मिलकर विवादित सौदे की या व्यवहार की जाँच करते है.अब सवाल यह उठता है की जब सांसदों को ही जाँच करनी है तो फिर अलग समिति क्यों बनाते है.सौदे की जाँच तो संसद में भी की जा सकती है.इसका जवाब आसान है.हमारे लोकसभा में 545 सांसद होते है और राज्यसभा में 250 सांसद होते है. कुल मिलाकर इनकी संख्या हो जाती है 795 सांसद.

अब इतने सारे लोग किसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे तो हंगामा होगा.इस हंगामे के बिच न ही कोई चर्चा हो पायेगी और नही कोई समाधान निकलेगा.इसी बात को ध्यान में रखते हुए एक ऐसी समिति बनायीं जाती है जिनमे कम सदस्य हो और जाँच ठीक तरह से हो सके.इसलिए इस समीती को मिनी संसद कहा जाता है.

जेपीसी में किस पक्ष के कितने सदस्य होते है – jpc kya hai

अगर कोई समिति बनती है तो उसमें काम करने वाले सदस्यों को लेकर बहस होती है.यह तय करना मुश्किल हो जाता है की किस पक्ष के कितने सदस्य समिति में होंगे.एक पक्ष के ज्यादा सदस्य होने पर समिति की जाँच निष्पक्षता से नही होगी.इसी बात को ध्यान में रखकर जेपीसी में सदस्यों की संख्या के लिए नियम बनाए गए है.

जेपीसी के नियमो के अनुसार लोकसभा और राज्यसभा के संख्याबल के अनुसार समिति में सदस्यों को लिया जाता है.सदन में जिस पक्ष के ज्यादा सांसद है समिति में भी उस पक्ष के ज्यादा सदस्य होंगे.आमतौर जेपीसी में सत्ता पक्ष के ज्यादा सदस्य होते है.विपक्ष के साथ साथ बाकी के पक्षों के भी कुछ सांसदों को जेपीसी में स्थान मिलता है.

जेपीसी के अधिकार – jpc kya hai

भारत के संसद के तरह ही जेपीसी को भी कई अधिकार होते है.जेपीसी जब चाहे तब सौदे से संबधित किसी भी व्यक्ति या संस्था से पूछताछ कर सकती है.सौदे से संबधित किसी भी व्यक्ति या संस्था से जुबानी या लिखित सबूत माँगने का अधिकार जेपीसी के पास होता है.जेपीसी के आदेश को न मानना संसद की का अपमान माना जाता है.कुल मिलाकर जेपीसी के पास वह सारे अधिकार होते है जिससे सभी सरकारी एवम् गैर सरकारी अधिकारियों से सवाल जवाब और कारवाई की जा सके.

अबतक कितनी बार हुआ है जेपीसी का गठन – jpc kya hai

स्वतंत्र भारत के इतिहास में अबतक पांच बार जेपीसी का गठन हो चूका है.अबतक गठन हुयी पांच जेपीसी कुछ इस तरह है.

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  • राजीव गांधी के कार्यकाल में हुए बोफोर्स तोप सौदे की जांच के लिए साल 1987 में जेपीसी का गठन किया गया था.लेकिन बाद में समिति का रिपोर्ट तैयार होने से पहले ही विपक्ष ने इसका बॉयकॉट कर दिया था.
  • हर्षद मेहता स्टाक मार्केट घोटाला के लिए साल 1992 में जेपीसी का गठन किया गया.मतभेदों की वजह से इस जेपीसी की सिफारिशें पूरी तरह से लागू नहीं हो सकीं.
  • केतन पारेख शेयर मार्केट घोटाला में साल 2001 में जेपीसी का गठन हुआ.इस जेपीसी ने अपने अंतिम निर्णय में स्टॉक मार्केट रेगुलेशन में बदलाव की सिफारिश की थी.
  • सॉफ्ट ड्रिंक पेस्टिसाइड मामला में साल 2003 में जेपीसी का गठन किया गया था.
  • बहुचर्चित टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला के लिए साल 2011 में जेपीसी का गठन किया गया था.30 सदस्यों वाली इस कमिटी को लेकर अभीतक विवाद चल रहा है.
  • मौजूदा समय में कांग्रेस सरकार के समय हुए वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे की जाँच के लिए जेपीसी का गठन करने की मांग उठ रही है.

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नोट:- हमें उम्मीद है आपको आपका सवाल “jpc kya hai” का जवाब मिल गया होगा.इस आर्टिकल में लिखी गयी सभी जानकारी को लिखनें मे बेहद सावधानी बरती गयी है.फिर भी किसी भी प्रकार त्रुटि की संभावना से इनकार नही किया जा सकता.इसके लिए आपके सुझाव कमेंट के माध्यम से सादर आमंत्रित हैं.

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