नागपंचमी कब है ? nag panchami 2019 kab hai ?

nag panchami 2019 kab hai – हिंदु धर्म की मान्यताओं के अनुसार हर जिव जंतु में भगवान का वास होता है.इसी भावना से प्रेरित होकर हिंदु समुदाय नागपंचमी के दिन साप की पूजा की जाती है.नाग पंचमी का त्यौहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है.ज्योतिष के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग हैं.इस दिन नागों की पूजा प्रधान रूप से की जाती है.


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मान्यता है की इस दिन व्रत कर नागों की पूजा करने से सर्पदंश का भय नही होता.इस दिन लोग अपने घर के द्वारो पर सर्प का चित्र बनाते है.देश के कई इलाको में इस दिन नागों को अगस्त ऋषि की कसम दी जाती है और कहा जाता है की वे घर के आसपास न भटके और किसीको दंश ना करे.

नाग पंचमी पूजा मुहूर्त – nag panchami 2019 kab hai

इस साल नागपंचमी 5 अगस्त 2019 सोमवार के दिन है.


पूजा मुहूर्त : 05:44:27 से 08:25:27 तक
अवधि : 2 घंटे 41 मिनट


नागपंचमी पूजा विधि – nag panchami 2019 kab hai

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई और स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र पहनें.दीवार पर गेरू पोतकर पूजा करने का स्थान बनायें.
  • कच्चे दूध में कोयला घिस कर उससे गेरू से बने स्थान पर घर जैसी आकृति और उसके अंदर पांच फन वाले नाग देवता की आकृति बनायें.
  • अथवा घर के दरवाजे के दोनों तरफ पांच फन वाले नाग देवता की आकृति बनायें.
  • नाग देवता बनाने का एक अन्य तरीका यह है की एक रस्सी में सात गांठ लगा लें.इसे पाटे पर रखकर उसकी पूजा की जा सकती है.
  • नागपंचमी की बधाईया !

  • अब यदि संभव हो तो नाग की बमई पर एक कटोरी दूध चढ़ा कर पूजा करें.
  • बमई ना हो तो दीवार पर बने या पाटे पर बिराजे नाग देवता की पूजा भी की जा सकती है.
  • पूजा के लिए रोली ,अक्षत से टीका करके मोली , पुष्प ,गंध आदि अर्पित करें.भीगा अनाज , धान , खील , दूर्वा , खीर या दूध , मिठाई आदि अर्पित करें.
  • नागपंचमी की कथा सुने और आरती करें.
  • सास या जेठानी को भीगे अनाज , मिठाई तथा यथा शक्ति रूपये का बायना पैर छूकर दें और आशीर्वाद लें.

नागपंचमी की पौराणिक कथा – nag panchami 2019 kab hai

नागपंचमी की पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक सेठजी के सात पुत्र थे.सातों के विवाह हो चुके थे.सबसे छोटे पुत्र की पत्नी श्रेष्ठ चरित्र की विदूषी और सुशील थी, परंतु उसके भाई नहीं था.

एक दिन बड़ी बहू ने घर लीपने को पीली मिट्टी लाने के लिए सभी बहुओं को साथ चलने को कहा तो सभी धलिया और खुरपी लेकर मिट्टी खोदने लगी.तभी वहां एक सर्प निकला, जिसे बड़ी बहू खुरपी से मारने लगी. यह देखकर छोटी बहू ने उसे रोकते हुए कहा- ‘मत मारो इसे? यह बेचारा निरपराध है.’

यह सुनकर बड़ी बहू ने उसे नहीं मारा तब सर्प एक ओर जा बैठा. तब छोटी बहू ने उससे कहा-‘हम अभी लौट कर आती हैं तुम यहां से जाना मत. यह कहकर वह सबके साथ मिट्टी लेकर घर चली गई और वहां कामकाज में फँसकर सर्प से जो वादा किया था उसे भूल गई.

उसे दूसरे दिन वह बात याद आई तो सब को साथ लेकर वहां पहुंची और सर्प को उस स्थान पर बैठा देखकर बोली- सर्प भैया नमस्कार!

सर्प ने कहा- ‘तू भैया कह चुकी है, इसलिए तुझे छोड़ देता हूं, नहीं तो झूठी बात कहने के कारण तुझे अभी डस लेता.

वह बोली- भैया मुझसे भूल हो गई, उसकी क्षमा माँगती हूँ, तब सर्प बोला- अच्छा, तू आज से मेरी बहिन हुई और मैं तेरा भाई हुआ. तुझे जो माँगना हो, माँग ले.वह बोली- भैया! मेरा कोई नहीं है, अच्छा हुआ जो तू मेरा भाई बन गया.

nag panchami 2019 kab hai

कुछ दिन व्यतीत होने पर वह सर्प मनुष्य का रूप रखकर उसके घर आया और बोला कि ‘मेरी बहिन को भेज दो.’ सबने कहा कि ‘इसके तो कोई भाई नहीं था, तो वह बोला- मैं दूर के रिश्ते में इसका भाई हूँ, बचपन में ही बाहर चला गया था.

उसके विश्वास दिलाने पर घर के लोगों ने छोटी को उसके साथ भेज दिया. उसने मार्ग में बताया कि ‘मैं वहीं सर्प हूँ, इसलिए तू डरना नहीं और जहां चलने में कठिनाई हो वहां मेरी पूछ पकड़ लेना. उसने कहे अनुसार ही किया और इस प्रकार वह उसके घर पहुंच गई. वहां के धन-ऐश्वर्य को देखकर वह चकित हो गई.

एक दिन सर्प की माता ने उससे कहा- ‘मैं एक काम से बाहर जा रही हूँ, तू अपने भाई को ठंडा दूध पिला देना. उसे यह बात ध्यान न रही और उसने गर्म दूध पिला दिया, जिसमें उसका मुख बेतरह जल गया. यह देखकर सर्प की माता बहुत क्रोधित हुई.

नागपंचमी की बधाईया !

परंतु सर्प के समझाने पर चुप हो गई. तब सर्प ने कहा कि बहिन को अब उसके घर भेज देना चाहिए. तब सर्प और उसके पिता ने उसे बहुत सा सोना, चाँदी, जवाहरात, वस्त्र-भूषण आदि देकर उसके घर पहुंचा दिया.

इतना ढेर सारा धन देखकर बड़ी बहू ने ईर्ष्या से कहा- भाई तो बड़ा धनवान है, तुझे तो उससे और भी धन लाना चाहिए. सर्प ने यह वचन सुना तो सब वस्तुएं सोने की लाकर दे दीं. यह देखकर बड़ी बहू ने कहा- ‘इन्हें झाड़ने की झाड़ू भी सोने की होनी चाहिए’. तब सर्प ने झाडू भी सोने की लाकर रख दी.

सर्प ने छोटी बहू को हीरा-मणियों का एक अद्भुत हार दिया था. उसकी प्रशंसा उस देश की रानी ने भी सुनी और वह राजा से बोली कि- सेठ की छोटी बहू का हार यहां आना चाहिए.’

नागपंचमी की बधाईया !

राजा ने मंत्री को हुक्म दिया कि उससे वह हार लेकर शीघ्र उपस्थित हो मंत्री ने सेठजी से जाकर कहा कि ‘महारानीजी छोटी बहू का हार पहनेंगी, वह उससे लेकर मुझे दे दो’. सेठजी ने डर के कारण छोटी बहू से हार मँगाकर दे दिया.

छोटी बहू को यह बात बहुत बुरी लगी, उसने अपने सर्प भाई को याद किया और आने पर प्रार्थना की- भैया ! रानी ने हार छीन लिया है, तुम कुछ ऐसा करो कि जब वह हार उसके गले में रहे, तब तक के लिए सर्प बन जाए और जब वह मुझे लौटा दे तब हीरों और मणियों का हो जाए. सर्प ने ठीक वैसा ही किया. जैसे ही रानी ने हार पहना, वैसे ही वह सर्प बन गया. यह देखकर रानी चीख पड़ी और रोने लगी.


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यह देख कर राजा ने सेठ के पास खबर भेजी कि छोटी बहू को तुरंत भेजो. सेठजी डर गए कि राजा न जाने क्या करेगा? वे स्वयं छोटी बहू को साथ लेकर उपस्थित हुए.

राजा ने छोटी बहू से पूछा- तुने क्या जादू किया है, मैं तुझे दंड दूँगा. छोटी बहू बोली- राजन ! धृष्टता क्षमा कीजिए, यह हार ही ऐसा है कि मेरे गले में हीरों और मणियों का रहता है और दूसरे के गले में सर्प बन जाता है. यह सुनकर राजा ने वह सर्प बना हार उसे देकर कहा- अभी पहनकर दिखाओ.

छोटी बहू ने जैसे ही उसे पहना वैसे ही हीरों-मणियों का हो गया.यह देखकर राजा को उसकी बात का विश्वास हो गया और उसने प्रसन्न होकर उसे बहुत सी मुद्राएं भी पुरस्कार में दीं. छोटी बहू अपने हार और धन सहित घर लौट आई. उसके धन को देखकर बड़ी बहू ने ईर्ष्या के कारण उसके पति को सिखाया कि छोटी बहू के पास कहीं से धन आया है. यह सुनकर उसके पति ने अपनी पत्नी को बुलाकर कहा- ठीक-ठीक बता कि यह धन तुझे कौन देता है? तब वह सर्प को याद करने लगी.

तब उसी समय सर्प ने प्रकट होकर कहा- यदि मेरी धर्म बहिन के आचरण पर संदेह प्रकट करेगा उसे खा लूँगा. यह सुनकर छोटी बहू का पति बहुत प्रसन्न हुआ और उसने सर्प देवता का बड़ा सत्कार किया. उसी दिन से नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है और स्त्रियां सर्प को भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं.

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