राफेल डील क्या है ? Rafale deal wiki in hindi

Rafale deal wiki in hindi

Rafale deal wiki in hindi – राफेल विमान क्या है?

Rafale deal wiki in hindi – राफेल फ्रांस का मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है.इस विमान का निर्माण फ्रांस की कंपनी डिसाल्ट एविएशन ने किया है. साल 2001 में इस विमान को फ्रांसीसी वायु सेना में शामिल किया गया था.


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इस वक़्त फ्रांस की सेना में तकरीबन 120 राफेल विमान तैनात है.यह विमान 55000 फिट की ऊंचाई तक उड़ने में सक्षम है.इस विमान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि, इस विमान को दुश्मन का रडार भी नहीं पकड़ पाता है. यह विमान वाहक पोत से भी उड़ान भर सकता है. राफेल की मारक क्षमता 3700 किलोमीटर है.

इसका मतलब अगर भारत के पास यह विमान आ जाता है, तो भारत की पहुंच चीन के बीजिंग और पाकिस्तान के इस्लामाबाद तक हो जाएगी.इस विमान की सबसे बड़ी खासियत यह है की,विमान से परमाणु हथियार भी छोड़े जा सकते हैं. इस विमान की अधिकतम रफ्तार में 1900 किलोमीटर प्रति घंटा है.

Rafale deal wiki in hindi – भारत के लिए क्यों जरुरी है राफेल डील ?

भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों की काफी कमी है.भारत के पास ज्यादातर मिग-21 विमान है. मिग-21 विमान चालीस साल पुराने है और कुछ साल बाद रिटायर हो जायेंगे.भारतीय वायुसेना में जगुआर विमान है, जिन्हें 1970 के दशक के आखिर में बनाया गया था और बेहद जल्द यह विमान भी रिटायर्ड होने वाले है.

भारतीय वसुसेना में सबसे नया लड़ाकू विमान सुखोई है. सुखोई को1996 में खरीदा गया था.सुखोई चौथी जनरेशन का लड़ाकू विमान है यानि एक जनरेशन पुराना विमान. फिलहाल भारतीय सेना के पास पांचवे जनरेशन का कोई भी लड़ाकू विमान नही है.इसलिए भारतीय सेना जल्द से जल्द राफेल जैसा कोई बेहतरीन लड़ाकू विमान अपने खेमे में चाहती है.

Rafale deal wiki in hindi
राफेल लड़ाकू विमान

Rafale deal wiki in hindi – राफेल डील क्या है?

साल 2010 में फ्रांस से राफेल विमान खरीदने का सौदा यूपीए सरकार ने शुरू किया था. लेकिन यूपीए सरकार के कार्यकाल में यह सौदा किन्ही कारणों से पूरा नहीं हो पाया.यूपीए सरकार के वक्त यह करार 126 विमानों के लिए किया जाना था. पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी के मुताबिक उस वक्त इस सौदे में यह तय हुआ था कि, 18 विमान फ्रांस से तत्काल खरीदे जाएंगे और 108 विमानों का निर्माण भारत में होगा.

चार साल बाद सन 2014 में एनडीए सरकार सत्ता में आ गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद फिरसे राफेल की खरीदारी पर चर्चा शुरू हो गयी.साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस का दौर किया तब दोनों देशो के प्रधानमंत्रीयो ने इस डील पर हस्ताक्षर किए.23 सितंबर 2016 को भारत और फ्रांस के रक्षा मंत्रियों ने इस डील पर हस्ताक्षर किए.

इस डील के मुताबिक फ्रांस सरकार साल 2022 तक 36 राफेल विमान भारत को देगा.साथ ही फ्रांस सरकार राफेल विमान से जुडी हर तकनीकी सहायता भारत को मुहैया कराएगा.भारतीय पायलटो को ट्रेनिंग में भी फ्रांस सरकार मदत करेगी.

राफेल विमान के कई पुर्जे मेक इन इंडिया के तहत भारत में बनेंगे.यही नही इस डील में ऐसे कई मुद्दे शामिल है जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर गोपनीय रखा गया है.

Rafale deal wiki in hindi – राफेल डील पर विवाद क्या है ?

कांग्रेस पार्टी ने इस राफेल सौदे में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया है.काँग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने एनडीए सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है.

राहुल गाँधी ने सवाल पूछा है की जब अमेरिका के सबसे अत्याधुनिक विमान की कीमत भी 1500 करोड रुपए से ज्यादा नहीं है तो राफेल इतनी ज्यादा कीमत में क्यों खरीदा जा रहा है.

कांग्रेस का कहना है की,साल 2010 में यूपीए सरकार के दौरान होने वाले सौदे मे एक राफेल विमान की कीमत 428 करोड रुपए तय की गई थी. लेकिन अब एनडीए सरकार एक विमान 1555 करोड रुपए में खरीद रही है.

राहुल गाँधी ने आरोप लगाया है की,इस डील को करने से पहले कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति से कोई अनुमति नही ली गई थी.

कांग्रेस का आरोप है कि, सरकार इस पूरी डील के बारे में कोई जानकारी नही दे रही है.

कांग्रेस का यह भी कहना है कि जब कतर को फ्रांस यह विमान 695 करोड रुपए में बेच रहा है तो भारत यह विमान उससे दुगनी कीमतों पर क्यों खरीद रहा है.

राहुल गाँधी ने आरोप लगाया है कि एनडीए सरकार ने एचसीएल यानी हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड को इस सौदे से हटाकर अनिल अंबानी की कंपनी को इस सौदे में डाला है.

कांग्रेस पार्टी के आरोपो के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने अनिल अंबानी की कर्ज में डूबी कंपनी बचाने के लिए उन्हें राफेल डील का हिस्सा बनाया.इस डील से अनिल अंबानी की कंपनी को 30,000 करोड़ का फायदा पहुचाने की कोशिश हो रही है.

Rafale deal wiki in hindi :- डसाल्ट एविएशन की सफाई

राफेल विमान बनाने वाली कंपनी डसाल्ट एविएशन ने इस विवाद पर अपनी सफाई दी है.

डसाल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने मीडिया से कहा की,यह रक्षा समझौता दोनों देशो के सरकार के बिच हुआ है.इसमें कंपनी का कोई रोल नही.कंपनी केवल अपना पार्टनर चुन सकती है और इसीके तहत हमने रिलायंस डिफेंस को चुना.

एरिक ट्रैपियर ने आगे कहा,”राफेल विमान की कीमत हर ग्राहक के लिए समान होती है.कीमतों में फर्क केवल स्पेयर पार्ट और अतिरिक्त सेवा देने पर होती है.”

कांग्रेस पार्टी के आरोपों का जवाब देते हुए एरिक ट्रैपियर ने कहा,”इस सौदे में जिस तरह के भ्रष्टाचार की बात हो रही है ऐसी कोई बात नही है.रिलायंस और हमारे संबंध साल 2012 से है तब मौजूदा सरकार नही थी.रिलायंस के साथ हमारा सौदा 840 करोड़ का है नकी 30,000 करोड़ का.”

एरिक ट्रैपियर ने आगे कहा “हम अपने हर कस्टमर का सन्मान करते है.इस केस में हम फ्रांस और भारत दोनों के कानून का सन्मान करते है.अगर हमें किसी भी तरह की क़ानूनी जाँच का सामाना करना पड़े तो हम तैयार है.”

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नोट:- इस आर्टिकल में लिखी गयी सभी जानकारी को लिखनें मे बेहद सावधानी बरती गयी है.फिर भी किसी भी प्रकार त्रुटि की संभावना से इनकार नही किया जा सकता.इसके लिए आपके सुझाव कमेंट के माध्यम से सादर आमंत्रित हैं.

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