तीज कब है 2019 ? tij kab hai 2019 ?

tij kab hai 2019

tij kab hai 2019-भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाये जाने वाले व्रत को हरितालिका तीज व्रत कहा जाता है.हिंदु धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है.खासतौर पर सुहागन महिलाए और कुमारी कन्या इस व्रत को करती है.भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में भगवान शिव और माता पार्वती का विधिवत पूजन कर इस व्रत की फलप्राप्ति की जाती है.


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तीज के अनन्यसाधारण महत्त्व को देखते हुए महिलाए इस व्रत के प्रति सजग रहती है.अनजाने में कई यह व्रत छुट न जाए इसके लिए कैलेंडर में पहले से इसे मार्क करके रखा जाता है.कई महिलाए बार बार इंटरनेट पर इसकी जानाकरी लेती रहती है.तीज के इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए इस आर्टिकल में हमने तीज का मुहूर्त,पूजा की विधि और पौराणिक कथा को यहाँ बताया है.

तीज का शुभ मुहूर्त – tij kab hai 2019

इस साल तीज व्रत की 1 सितंबर 2019 से होगी.तीज का शुभ मुहूर्त शहर शहर के हिसाब से अलग अलग हो सकता है.लेकिन इन मुहूर्तों मे ज्यादा अंतर नही होता.


🌸मुहूर्त🌸

प्रातःकाल मुहूर्त : 05:58:51 से 08:31:45 तक

अवधि : 2 घंटे 32 मिनट

प्रदोष काल मुहूर्त :18:43:16 से 20:58:30 तक

अवधि : 2 घंटे 14 मिनट


तीज व्रत एव पूजन विधि -tij kab hai 2019

tij kab hai 2019

हरतालिका पूजन प्रदोष काल में किया जाता हैं.प्रदोष काल का मतलब ऐसा समय जहा दिन और रात एक दूसरे से मिलते है.

  • व्रत पूजन के लिए भगवान शिव माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बालू रेत या पवित्र जगह की मिट्टी से हाथों से बनाई जाती हैं.
  • इसके बाद फुलेरा बनाकर उसे सजाया जाता हैं.उसके भीतर रंगोली डालकर उस पर पटा अथवा चौकी रखी जाती हैं.चौकी पर एक सातिया बनाकर उस पर थाल रखते हैं
  • फिर उस थाल में केले के पत्ते को रखते हैं और तीनो प्रतिमा को केले के पत्ते पर आसीत किया जाता हैं.
  • सर्वप्रथम कलश बनाया जाता हैं जिसमे एक लौटा अथवा घड़ा लेते हैं और उसके उपर श्रीफल यानि नारियल रखते हैं.कलश के मुंह पर लाल नाडा बाँधते हैं और सातिया बनाकर उर पर अक्षत चढ़ाया जाता हैं और कलश का पूजन किया जाता हैं .
  • कलश पूजन के बाद सर्वप्रथम गणेश जी की प्रतिमा की पूजा की जाती हैं.उसके बाद शिव जी की पूजा जी जाती हैं.उसके बाद माता गौरी की पूजा की जाती हैं और इसके बाद हरतालिका की कथा पढ़ी जाती हैं.
  • फिर सभी मिलकर आरती की जाती हैं जिसमे सर्प्रथम गणेश जी कि आरती फिर शिव जी की आरती फिर माता गौरी की आरती की जाती हैं.
  • विधिवत पूजा के बाद भगवान् की परिक्रमा की जाती हैं और रात भर जागकर पांच पूजा एवं आरती की जाती हैं.
  • अगले दिन सुबह आखरी पूजा के बाद माता गौरी को जो सिंदूर चढ़ाया जाता हैं उस सिंदूर से सुहागन स्त्री सुहाग लेती हैं.
  • जिस ककड़ी एवं हलवे का भोग भगवान को लगाया जाता हैं.उसी ककड़ी को खाकर उपवास तोडा जाता हैं.
  • अंत में सभी सामग्री को एकत्र कर पवित्र नदी एवं कुण्ड में विसर्जित किया जाता हैं .

तीज व्रत के नियम – tij kab hai 2019

महिलाए तीज व्रत को लेकर जीतनी उत्साहित रहती है उतनी ही उनके मन में घबराहट भी रहती है.इस घबराहट के पीछे तीज व्रत के नियम है.अगर आप पहली बार तीज व्रत करने वाले है तो आपको इस व्रत के कुछ नियमो को ध्यान में रखना होगा.

  • इस व्रत को सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं रखती हैं.
  • एक बार व्रत रखने के बाद जीवन भर इस व्रत को रखना पड़ता है.
  • व्रत करने वाली महिला अगर अगर बीमार हो तो उसके बदले घर की अन्य महिला या फिर पति भी इस व्रत को रख सकता है.
  • तीज व्रत करने वाली महिला को किसी पर भी गुस्सा नहीं करना चाहिए.इसके कारन व्रत की फलप्राप्ति नही होती.
  • व्रत करने वाली महिला को पति के साथ क्लेश नहीं करना चाहिए.मान्यता है कि ऐसा करने से व्रत अधूरा रह जाता है.
  • इस व्रत को रखने के बाद किसी बुजुर्ग का अपमान न करें. मान्यता है कि ऐसा करने से व्रत का फल नहीं मिलता है.
  • व्रत में सोना वर्जित माना गया है.व्रत के दौरान रात के वक्त भजन कीर्तन किया जाता है.
  • व्रत को अगले दिन सूर्योदय के बाद माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाने के बाद ही छोड़ा जाना चाहिए.

तीज व्रत से जुडी पौराणिक कथा – tij kab hai 2019

tij kab hai 2019

एक पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था.हिमालय पर गंगा नदी के तट पर माता पार्वती ने भूखे-प्यासे रहकर तपस्या की.माता पार्वती की यह स्थिति देखकप उनके पिता हिमालय बेहद दुखी हुए.एक दिन महर्षि नारद भगवान विष्णु की ओर से पार्वती जी के विवाह का प्रस्ताव लेकर आए लेकिन जब माता पार्वती को इस बात का पता चला तो, वे विलाप करने लगी.

एक सखी के पूछने पर उन्होंने बताया कि, वे भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप कर रही हैं.इसके बाद अपनी सखी की सलाह पर माता पार्वती वन में चली गई और भगवान शिव की आराधना में लीन हो गई.इस दौरान भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन हस्त नक्षत्र में माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और भोलेनाथ की आराधना में मग्न होकर रात्रि जागरण किया.

माता पार्वती के कठोर तप को देखकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और पार्वती जी की इच्छानुसार उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया.तभी से अच्छे पति की कामना और पति की दीर्घायु के लिए कुंवारी कन्या और सौभाग्यवती स्त्रियां हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं और भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं.

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नोट:- हमें उम्मीद है आपको आपके सवाल “tij kab hai 2019” का जवाब मिल गया होगा.इस आर्टिकल में लिखी गयी सभी जानकारी को लिखनें मे बेहद सावधानी बरती गयी है.फिर भी किसी भी प्रकार त्रुटि की संभावना से इनकार नही किया जा सकता.इसके लिए आपके सुझाव कमेंट के माध्यम से सादर आमंत्रित हैं.

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