वेबसाइट पर ट्रैफिक क्या होता है? Website traffic kya hai

Website traffic kya hai

Website traffic kya hai – वेबसाइट ट्रैफिक क्या है?

Website traffic kya hai – वेबसाइट या ब्लॉग पर आनेवाले इंटरनेट सर्फर को ट्रैफिक कहा जाता है.आम भाषा में वेबसाइट पर आनेवाली भीड़ को हम ट्रैफिक कह सकते है.वेबसाइट पर आनेवाले ट्रैफिक की संख्या में इजाफा होना ही किसी भी वेबसाइट की तरक्की होना है.बिना ट्रैफिक के कोई भी वेबसाइट एकदम बेकार हो जाती है. या कहे तो मार्किट में उसकी कोई कीमत नही होती है.

वेबसाइट ट्रैफिक के प्रकार – Website traffic kya hai

वेबसाइट और ब्लॉग में आनेवाले ट्रैफिक को चार हिस्सों में बाटा गया है.जिनमे ऑर्गेनिक ट्रैफिक,पेड ट्रैफिक, रेफेरल ट्रैफिक और डायरेक्ट ट्रैफिक आता है.

Website traffic kya hai – ऑर्गेनिक ट्रैफिक

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सर्च इंजिन द्वारा आनेवाला ट्रैफिक

इन्ह चारों तरह के ट्रैफिक में ऑर्गेनिक ट्रैफिक सबसे महत्वपूर्ण है.आर्गेनिक ट्रैफिक का मतलब ऐसे विजिटर जो सर्च इंजिन द्वारा वेबसाइट तक पोहचते है.

मतलब अगर कोई शख्स गूगल, बिंग,याहू जैसी सर्च इंजिन में कुछ खोजता है. और इसके जवाब में सर्च इंजिन अपने रिजल्ट में आपके वेबसाइट या ब्लॉग को दिखाता है. तो ऐसे में वह शख्स आपके वेबसाइट पर आएगा.और ऐसे ही ट्रैफिक को ऑर्गेनिक ट्रैफिक कहते है.किसी भी वेबसाइट में ऑर्गेनिक ट्रैफिक बेहद महत्वपूर्ण है.क्योंकि यह खुद ब खुद काम करता है. इसके लिए क्रिएटर को कुछ भी भुगतान नही करना पड़ता.नही उसे सोशल मीडिया में अपने वेबसाइट की प्रमोशन करनी पड़ती है.

ऑर्गेनिक ट्रैफिक में एडवरटाइजर भी अच्छा ख़ासा पैसा लगाते है.इसलिए ऑर्गेनिक ट्रैफिक द्वारा कंटेंट क्रिएटर की आय अच्छी होती है.

Website traffic kya hai – पेड ट्रैफिक

पेड ट्रैफिक का मतलब ख़रीदा हुआ ट्रैफिक.अब आप सोचेंगे की ट्रैफिक कैसे खरीदेंगे? यहाँ खरीदने का मतलब हे पैसा देकर अपने वेबसाइट का प्रमोशन करना या एडवरटाइज करना.जिस तरह कोई वेबसाइट का मालिक एडवरटाइजर के जरिए पैसे कमाता है.उसी तरह वह पैसे देकर अपने वेबसाइट की एडवरटाइज भी कर सकता है.

मान लीजिए अगर आपको अपने वेबसाइट के किसी पोस्ट पर ट्रैफिक लाना है. तो आप गूगल,बिंग जैसी सर्च इंजिन में उस पोस्ट की जाहिरात चलाएंगे.अगर कोई शख्स आपके उस पोस्ट के रिलेटेड कुछ खोजता है.तो सर्च इंजिन उस शख्स को पहले आपकी पोस्ट दिखायेगा.और यदि वह शख्स उस जाहिरात के जरिए आपके वेबसाइट पर आता है,तो यह पेड ट्रैफिक कहलायेगा.क्योंकि उस शख्श को आपने जाहिरात द्वारा अपने वेबसाइट तक लाया है और आपने पैसे देकर जाहिरात दिखाई है.

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पेड ट्रैफिक के लिए अमेज़न की जाहिरात

पेड ट्रैफिक ज्यादातर बड़ी बड़ी कंपनिया करती है. जिनके बिच बड़ा कम्पटीशन होता है.जैसे ऊपर की तस्वीर में आप देख सकते है की,एक ही प्रोडक्ट के लिए कितने सारी कंपनियों ने एडवरटाइज चलायी है. यहाँ हर कंपनी ट्रैफिक अपने वेबसाइट पर भेजना चाहती है.और जो ज्यादा पैसा देता है,सर्च इंजिन सबसे ऊपर उसकी जाहिरात चलाती है.

Website traffic kya hai – सोशल ट्रैफिक या रेफेरल ट्रैफिक

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सोशल मीडिया से आनेवाला ट्रैफिक

सोशल या रेफेरल ट्रैफिक का मतलब साझा किया हुआ ट्रैफिक या किसी थर्ड पार्टी द्वारा आपकी वेबसाइट तक पहुचने वाला ट्रैफिक.

इन दिनों ट्रैफिक के लिए सबसे ज्यादा भरोसा सोशल मीडिया का किया जाता है.क्योंकि सोशल मीडिया द्वारा वेबसाइट पर ट्रैफिक लाना आसान हो गया है. साथ ही ऑर्गेनिक ट्रैफिक में बेहद ज्यादा कॉम्पिटिशन है और पेड ट्रैफिक हर किसी के बस की बात नही है.
सोशल मीडिया या थर्ड पार्टी द्वारा आयी ट्रैफिक को रेफेरल ट्रैफिक कहते है.अगर आपने अपनी वेबसाइट के आर्टिकल को सोशल मीडिया पर शेयर किया है तो उस लिंक से जो भी ट्रैफिक आपकी वेबसाइट तक पोहचाता हे उसे रेफेरल ट्रैफिक कहते है.

साथ ही अगर आपके वेबसाइट की लिंक किसी दूसरे वेबसाइट पर है और यदि कोई शख्स उस वेबसाइट से आपकी वेबसाइट पर आता है तो उसे भी रेफेरल ट्रैफिक कहते है. जैसे की विकिपीडिया या क़्वोरा में अगर आपकी वेबसाइट की लिंक है तो उस लिंक से आनेवाली ट्रैफिक को रेफेरल ट्रैफिक कहा जायेगा.

Website traffic kya hai – डायरेक्ट ट्रैफिक

वेबसाइट ट्रैफिक की आखरी ट्रैफिक सोर्स है डायरेक्ट ट्रैफिक.वेबसाइट के यूआरएल से आनेवाले ट्रैफिक को डायरेक्ट ट्रैफिक कहते है.

अगर कोई शख्स इंटरनेट पर किसी वेबसाइट का यूआरएल डालता है तो वह आपकी वेबसाइट पर पहुच जायेगा. इसमें ध्यान देने वाली बात यह है की सीधे इंटरनेट से आनेवाले ट्रैफिक को डायरेक्ट ट्रैफिक कहा जाता है. गूगल या बिंग जैसे सर्च इंजन से आनेवाले ट्रैफिक को डायरेक्ट ट्रैफिक नही समझा जायेगा.

उदहारण के तौर पर इस वेबसाइट का यूआरएल www.kyakyukaun.com” है.अगर कोई व्यक्ति इस यूआरएल को सीधे इंटरनेट पर डालेगा,गूगल पर नही.और इस वेबसाइट तक पोहचेगा तब यह डायरेक्ट ट्रैफिक कहलायेगा.अगर कोई शख्स इस यूआरएल को गूगल पर डालता है और सर्च करता है.बादमे गूगल के दिखाए हुए उस रिजल्ट के द्वारा इस वेबसाइट पर पोहचाता है. तब यह ट्रैफिक डायरेक्ट नही बल्कि ऑर्गेनिक ट्रैफिक कहलायेगा.क्योंकि ट्रैफिक सर्च इंजन के माध्यम से आया है.

डायरेक्ट ट्रैफिक का दुसरा जरिया है बुकमार्क.जब हमें कोई वेबसाइट पसंद आती है और बार बार उस वेबसाइट पर जाना चाहते है. तब हम उस वेबसाइट का बुकमार्क सेव कर लेते है.ऐसे बुकमार्क के जरिए वेबसाइट तक पोहचने वाले ट्रैफिक को भी डायरेक्ट ट्रैफिक कहते है.

किसी भी वेबसाइट की शुरुआती दिनों में ज्यादातर डायरेक्ट ट्रैफिक ही आता है.लेकिन यह कोई मायने नही रखता क्योंकि यह इंटरनेट पर फिर रहे बोट्स होते है असली ट्रैफिक नही होता.वेबसाइट के मशहूर होनेपर जो डायरेक्ट ट्रैफिक आता है वह असली होता है.

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